नई दिल्ली,(एआर लाइव न्यूज)। चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कर सख्त टिप्पणी की और चुनाव से संबंधित सभी मतपत्र, वीडियोग्राफी सहित संपूर्ण रिकॉर्ड पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को सौंपने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम की होने वाली आगामी बैठक को भी स्थगित करने के आदेश दिए हैं।(supreme court on chandigarh mayor election)
मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रिटर्निंग अधिकारी ने मतपत्रों को खराब किया है। यह लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं, इस तरह से लोकतंत्र की हत्या करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। इस अफसर पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव के अधिकारी अनिल मसीह को 19 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर पेश होने के आदेश दिए हैं और पूरे मामले में वीडियो में दिख रही उनकी भूमिका को लेकर जवाब मांगा है।
चुनाव अधिकारी ने आप और कांग्रेस के 8 वोट इनवैलिड किए थे
पिछले दिनों चंडीगढ़ में मेयर चुनाव हुआ था। एक सांसद और 35 पार्षदों को मिलाकर 36 वोट थे। इनमें 14 भाजपा पार्षद, एक भाजपा सांसद किरण खेर, 1 अकाली दल और बाकी 20 वोट आप और कांग्रेस पार्षदों के थे। सभी ने वोटिंग की। चुनाव अधिकारी ने काउंटिंग के बाद कहा कि भाजपा को 16 वोट मिले। वहीं, आप-कांग्रेस के उम्मीदवार को 12 वोट मिले हैं, चुनाव अधिकारी ने आप और कांग्रेस के कुल 8 वोट इनवैलिड घोषित किए थे। आप और कांग्रेस गठबंधन के इतने वोट इनवैलिड होने से चंडीगढ़ में भाजपा का मेयर बना था।
चुनाव अधिकारी द्वारा 8 वोट इनवैलिड घोषित करने पर आम आदमी पार्टी के पार्षद कुलदीप ढलोर ने चुनाव में गड़बड़ी का आरोप लगाया था और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की।
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