कॉलेज में प्राकृतिक खेती पर डिग्री कॉर्स होगा शुरू
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MPUAT udaipur) का बुधवार को 17वां दीक्षांत समारोह आयोजित हुआ। मुख्य अतिथि कुलाधिपति व प्रदेश के राज्यपाल कलराज मिश्र ने 864 स्नातक, 201 स्नातकोत्तर व 74 विद्या-वाचस्पति छात्र-छात्राओं को दीक्षा प्रदान करने के साथ ही उपाधियां दीं, साथ ही 42 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक से नवाजा। राज्यपाल ने इस वर्ष का कुलाधिपति स्वर्ण पदक दीक्षा शर्मा एमएससी कृषि (सत्य विज्ञान) को प्रदान किया।
राज्यपाल कलराज मिश्र ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा और कृषि पर विशेष ध्यान देकर ही हम सही मायने में राष्ट्र को समृद्ध बना सकते है। राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार खाद्य और पोषण सुरक्षा ही है। प्रति व्यक्ति खाद्य उत्पादन में वृद्धि के बाद भी जनसंख्या का एक बड़ा वर्ग अल्पपोषण व कुपोषण की विपदा झेल रहा है। कृषि में आमूलचूल परिवर्तन से ही इन चुनौतियों का सामना करना संभव है। कृषि अनुसंधान व शोध में स्थानीय जरूरतों के मुताबिक सकारात्मक बदलाव हो।

महाराणा प्रताप के दरबानी पंडित चक्रपाणी मिश्र के ग्रंथ को विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाए
राज्यपाल ने उदाहरण देते हुए बताया कि महाराणा प्रताप के एक दरबानी पंडित थे. चक्रपाणि मिश्र। उन्होंने प्रताप के कहने पर ही पौधों और फसलों से जुड़े ज्ञान पर महत्वपूर्ण शोधपाक लेखन किया। मेवाड़ की जल संरक्षण परम्परा है, यहां के औषधीय पौधों के बारे में दुर्लभ जानकारियां चक्रपाणि मिश्र ने अपने ग्रंथ विश्ववालम में निरुपित किया है। एशियन एग्री हिस्ट्री फाउण्डेशन ने इस ग्रंथ को प्रकाशित किया है। उन्होंने आह्वान किया कि इस ग्रंथ में खेती से जुड़े परम्परागत ज्ञान को विश्वविद्यालय आगे बढ़ाए।

एमपीयूएटी पहली बार एक वर्ष में 12 भारतीय व विदेशी पेटेन्ट हासिल किए
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली के उपमहानिदेशक डॉ.आरसी अग्रवाल ने दीक्षांत समारोह में कहा कि देश में इस समय कुल 76 विश्वविद्यालय और 732 केविके है। आठ वर्ष पूर्व तक 23 प्रतिशत छात्राएं कृषि शिक्षा ग्रहण कर रही थी, जिनकी संख्या बढ़कर 50 प्रतिशत हो गयी है, जो कृषि में महिलाओं की भागीदारी के अच्छे संकेत है।
एमपीयूएटी कुलपति अजीत कुमार कर्नाटक ने इस अवसर पर बताया कि प्रकृतिक खेती पर आगामी वर्ष से विश्वविद्यालय कृषि स्नातक कार्यक्रम का एक कोर्स चलाएगा। साथ ही एक प्रबम डिग्री कार्यक्रम आरंभ करने पर भी मंथन चल रहा है। डॉ कर्नाटक ने प्रमुख उपानब्धियां गिनाते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने पहली बार अभिन्न तकनीक विकसित कर विगत एक वर्ष में 12 भारतीय व विदेशी पेटेन्ट हासिल किए।
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