दिल्ली (एआर लाइव न्यूज)। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने पायरेसी (Piracy) के कारण फिल्म उद्योग को हर वर्ष 20,000 करोड़ रुपये का नुकसान को रोकने के लिए कड़े कदम उठाये। पायरेसी के खिलाफ शिकायतें प्राप्त करने और बिचौलियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पायरेटेड सामग्री को हटाने का निर्देश देने के लिए नोडल अधिकारियों का एक संस्थागत तंत्र स्थापित किया है।
अधिकारी वेबसाइट/ऐप/लिंक को ब्लॉक करने/हटाने का निर्देश देने के लिए अधिकृत
सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा पायरेसी के खिलाफ शिकायतें प्राप्त करने और बिचौलियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पायरेटेड सामग्री को हटाने का निर्देश देने के लिए नोडल अधिकारियों का एक संस्थागत तंत्र स्थापित किया है। सीबीएफसी और सूचना एवं प्रसारण अधिकारी पायरेटेड फिल्मी सामग्री वाली किसी भी वेबसाइट/ऐप/लिंक को ब्लॉक करने/हटाने का निर्देश देने के लिए अधिकृत हैं।
3 महीने की कैद और 3 लाख तक रुपये के जुर्माने की सख्त सजा
संसद में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस कानून में 40 वर्ष बाद संशोधन किया गया, ताकि 1984 में अंतिम महत्वपूर्ण संशोधन किए जाने के बाद डिजिटल पायरेसी सहित फिल्म पायरेसी के खिलाफ प्रावधानों को इसमें शामिल किया जा सके। कानून के तहत नोडल अधिकारी से निर्देश प्राप्त करने के बाद, डिजिटल प्लेटफॉर्म 48 घंटे की अवधि के भीतर पायरेटेड सामग्री देने वाले ऐसे इंटरनेट लिंक को हटाने के लिए बाध्य होगा। संशोधन में न्यूनतम 3 महीने की कैद और 3 लाख तक रुपये के जुर्माने की सख्त सजा शामिल है, सजा को 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है और ऑडिटेड सकल उत्पादन लागत का 5 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
कौन आवेदन कर सकता है?
मूल कॉपीराइट धारक या इस उद्देश्य के लिए उनके द्वारा अधिकृत कोई भी व्यक्ति पायरेटेड सामग्री को हटाने के लिए नोडल अधिकारी को आवेदन कर सकता है। यदि कोई शिकायत किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा की जाती है जिसके पास कॉपीराइट नहीं है या कॉपीराइट धारक द्वारा अधिकृत नहीं है, तो नोडल अधिकारी निर्देश जारी करने से पहले शिकायत की वास्तविकता तय करने के लिए मामले दर मामले के आधार पर सुनवाई कर सकता है।


