- सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की संयुक्त कार्यशाला में उभर के आयी बड़ी समस्या
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE), नई दिल्ली और राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल (RSPCB) की “इम्प्रूविंग एनवायर्नमेंटल परफॉरमेंस ऑफ इंडस्ट्रीज” विषय पर उदयपुर में संयुक्त कार्यशाला हुई है। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने उदयपुर में बढ़ रहे वायु प्रदूषण के मुख्य कारकों और समाधान को लेकर चर्चा की।
सीएसई की औद्योगिक प्रदूषण इकाई की उप कार्यक्रम प्रबंधक श्रेया वर्मा ने कहा कि सीएसई के अब तक किए गए आंकलन के अनुसार उदयपुर में होने वाली अत्यधिक खनन गतिविधियां, खनन उद्योगों से होने वाले फ्यूजिटिव उत्सर्जन और सड़क की धूल वायु प्रदूषण के बढ़ने का मुख्य कारण है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2019 में शुरू किए गए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम एनसीएपी द्वारा उदयपुर को गैर-प्राप्ति शहर के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। सीएसई ने उदयपुर की हवा को साफ करने के लिए एक रोडमैप की भी पेशकश की है। रोडमैप का फोकस उद्योगों के पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार और औद्योगिक क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान करने पर है। कार्यशाला में राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम, जिला उद्योग केंद्र, उद्योगों, परामर्शदाताओं और औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों सहित प्रमुख हितधारधारकों ने हिस्सा लिया।
जिले में 885 वायु प्रदूषणकारी उद्योग
आरएसपीसीबी द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, उदयपुर में लगभग 1207 उद्योग है, जिनमें से 885 की पहचान वायु प्रदूषणकारी उद्योगों के रूप में की गई है। वहीं 446 ऐसे उद्योग हैं जो फ्यूजिटिव उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं और 439 ईंधन खपत वाले उद्योग हैं। इन 446 फ्यूजिटिव उत्सर्जन वाले उद्योगों में से 366 खनिज पीसने वाली इकाइया हैं, जबकि 80 स्टोन क्रशर संयंत्र हैं।
सीएसई के औद्योगिक प्रदूषण विभाग के कार्यक्रम निदेशक निवित यादव कहते हैं ये उद्योग भारी मात्रा में धूल और उत्सर्जन उत्पन्न करते हैं और उनके उत्सर्जन को कम करने के लिए सख्त पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है। इन क्षेत्रों से निकलने वाली धूल आस पास के आवासीय क्षेत्रों के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है, इसलिए इस क्षेत्र पर प्राथमिकता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
प्रदूषण नियंत्रण के प्रति एक मजबूत मानसिकता का निर्माण करना होगा
प्रदूषण नियंत्रण मंडल, उदयपुर के क्षेत्रीय अधिकारी शरद सक्सेना ने कहा RSPCB और उद्योगों को जमीनी स्तर पर दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण के प्रति एक मजबूत मानसिकता का निर्माण करना होगा।
उदयपुर में उद्योग बड़े पैमाने पर कोयला, लकड़ी या तरल ईंधन का उपयोग कर रहे थे। इन ईंधन खपत करने वाले उद्योगों से कणिकीय पदार्थ प्रदूषण भार 148 टन प्रति वर्ष था, सल्फर डाइऑक्साइड भार 200 टन प्रति वर्ष था, जबकि नाइट्रोजन ऑक्साइड भार 162 टन प्रति वर्ष था। निकट भविष्य में उदयपुर में उद्योगों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए यह सिफारिश की जाती है कि शहर में उद्योगों को स्वच्छ ईंधन के प्रयोग की और अग्रसर होना चाहिए।
सड़कों की स्थिति असंतोषजनक है : CSE
सीएसई की ओर से यह बात भी रखी गयी कि उदयपुर औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति असंतोषजनक है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी सड़कों और फुटपाथों की मरम्मत और पक्कीकरण किया जाए। औद्योगिक क्षेत्रों में ब्लेकटॉप वाली पक्की सड़कें होनी चाहिए, जिसमें रोड शोल्डर का फुटपाथ भी शामिल है। अच्छी गुणवत्ता वाली ऐसी सीमेंट कंक्रीट सड़कें बनायी जाएँ जो लंबे समय तक भारी वाहन की आवाजाही को सहन कर सके। सड़कों की नियमित सफाई भी महत्वपूर्ण है।


