उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मंगलवार को उदयपुर के भुवाणा चौराहा स्थित सरोज हॉस्पिटल एवं ट्रोमा सेंटर (saroj hospital and trauma center udaipur) नाम से संचालित हो रहे अवैध हॉस्पिटल पर छापा मारा। हॉस्पिटल में टीम को कुछ मरीज भी भर्ती मिले, लेकिन जब मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शंकर एच बामनिया ने हॉस्पिटल संचालक और डॉक्टर से हॉस्पिटल रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस से लेकर अन्य दस्तावेज मांगे तो उनके पास कोई दस्तावेज या रजिस्ट्रेशन नहीं मिला। यहां तक कि वहां जो डॉक्टर मरीजों का उपचार कर रहे थे, उनके पास भी उनका प्रेक्टिस लाइसेंस नहीं था।
शहर के मुख्य चौराहे पर इस तरह से संचालित हो रहे अवैध हॉस्पिटल की जानकारी सीएमएचओ ने पुलिस विभाग को दी और कानूनी कार्यवाही शुरू की।
मरीज को सरकारी हॉस्पिटल के बजाए निजी हॉस्पिटल लाने के रैकेट का फिर हुआ खुलासा
सीएमएचओ डॉक्टर शंकर एच बामनिया ने बताया कि केसर देवी ने अपने परिवार जनों के साथ उपस्थित होकर लिखित शिकायत दी कि सरोज हास्पिटल में कार्यरत डॉ सुरज्ञान जो राजकीय सेवा में है, एम्बुलेंस चालकों को कमीशन देकर मरीजों को एमबी हॉस्पिटल के बजाए सीधे सरोज हास्पिटल लेकर आने के लिए बोल रखा है। इससे अनजान मरीज इनके झांसे में फंस जाता है।
केसर देवी ने शिकायत में बताया था कि बिजली से जल जाने पर भरत निनामा को वे उदयपुर के राजकीय चिकित्सालय ला रहे थे लेकिन एंबुलेंस चालक उन्हें धोखे से सरोज हास्पिटल लेकर आ गया। ऑपरेशन के नाम पर 10 लाख रूपए से अधिक रकम वसूल कर ली और अब तीन लाख रूपए और मांगे जा रहे हैं। लेकिन भरत के स्वास्थ्य में कोई संतोषजनक सुधार नहीं हो रहा है।
शिकायत का सत्यापन किया तो विश्वस्त सूत्रों से पता चला कि हॉस्पिटल ही अवैध रूप से संचालित हो रहा है। इस पर डॉक्टर डीआरसीएचओ अशोक आदित्य, एसएमओ डॉक्टर राकेश गुप्ता, सहायक प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्र सोलंकी और चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना को-ऑर्डिनेटर शरद पाटीदार की टीम गठित की। आज मंगलवार को टीम ने सरोज हॉस्पिटल एवं ट्रोमा सेंटर का औचक निरीक्षण किया।

मरीजों के साथ हो रहा था धोखा
टीम ने वहां जाकर निरीक्षण एवं पूछताछ की और उसके संचालन से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा। लेकिन हॉस्पिटल संचालक चिकित्सा संचालन संबंधी क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट का रजिस्ट्रेशन, वर्तमान में कार्यरत चिकित्सकों की सूची, पैरामेडिकल स्टाफ की सूची, बायोमेडिकल वेस्ट संबंधी प्रमाण पत्र, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड संबंधी प्रमाण पत्र सहित कोई भी दस्तावेज नहीं दे सके।
मौके पर पता चला कि चिकित्सालय के मालिक ललित चोरडिया ने हॉस्पिटल संचालन प्रक्रिया संबंधी कोई कार्यवाही नहीं की थी एवं प्रमाण पत्र नहीं ले रखे थे। पूरा हॉस्पिटल अवैध रूप से संचालित किया जा रहा था। यहां तक कि वहां कार्यरत डॉ नितिन का राजस्थान में प्रेक्टिस करने के लिए आरएमसी नंबर भी नहीं था । वह भी अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे थे। इस तरह से वहां भर्ती मरीजों के साथ धोखा कर उनके जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था।

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