- थप्पड़ ने खोला मेडिकल क्षेत्र में कमीशनखोरी का रैकेट
- प्रार्थी ने डॉक्टर पर लगाया आरोप : सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती मरीज को सिद्धि विनायक हॉस्पिटल लाने के लिए चलता है कमीशनखोरी का पूरा रैकेट, जिनता गंभीर मरीज, उतना मोटा कमीशन
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर पुलिस के एससी/एसटी सेल ने हिरणमगरी सेक्टर 6 स्थित सिद्धि विनायक हॉस्पिटल संचालक डॉक्टर गजेन्द्र जोशी को गिरफ्तार किया है। डॉक्टर गजेन्द्र जोशी पर उन्हीं के यहां काम करने वाले युवक हीरालाल मेघवाल ने मारपीट-गालीगलौज का आरोप लगाया है और बताया कि सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती मरीज को सिद्धि विनायक हॉस्पिटल लाने के लिए कमीशनखोरी का पूरा रैकेट चलता है। डॉ. गजेन्द्र जोशी एंबुलेंस चालकों को एक मरीज का 5 हजार से 30 हजार रूपए तक का कमीशन देते हैं। जितना गंभीर मरीज, उतना मोटा कमीशन।
मामले की जांच कर रहे एससी/एसटी सेल डीएसपी अब्दुल रहमान ने बताया कि हिरणमगरी थाने में हीरालाल मेघवाल ने सिद्धि विनायक हॉस्पिटल के डॉ. गजेन्द्र जोशी के खिलाफ मारपीट और गालीगलौज के आरोप में एफआईआर दर्ज करवाई थी। मामला एससी-एसटी एक्ट में दर्ज हुआ तो उसकी तफ्तीश मेरे पास है। इस मामले में डॉ. गजेन्द्र जोशी को गिरफ्तार किया गया है। गवाहों के बयान में आए तथ्यों पर अनुसंधान चल रहा है।
परिवादी हीरालाल ने पुलिस बयान में बताया है कि वह डॉ. गजेन्द्र जोशी के हॉस्पिटल सिद्धि विनायक में मार्केटिंग का काम करता है। डॉ. गजेन्द्र जोशी ने उसे एमबी हॉस्पिटल में भर्ती मरीज को सिद्धि विनायक हॉस्पिटल लाने के लिए कहा था। हीरालाल उस वक्त गया नहीं, जब डॉक्टर गजेन्द्र जोशी को इस बात का पता चला तो उन्होंने हीरालाल के साथ मारपीट-गालीगलौज की। जानकारी के अनुसार पुलिस ने गिरफ्तार डॉ. गजेन्द्र जोशी को कोर्ट में पेश किया, कोर्ट ने उसे जमानत पर रिहा किया है।

उसे काम बताया था, उसने नहीं किया तो…: डॉक्टर गजेन्द्र जोशी
हालां कि डॉक्टर गजेन्द्र जोशी ने हीरालाल मेघवाल के आरोपों पर कहा कि वह मेरे हॉस्पिटल में काम करता था, मैंने उसे काम के लिए बोला था, उसने किया नहीं तो मैंने उसकी डांट लगाई थी। सरकारी हॉस्पिटल से मरीज लाने के लिए एंबुलेंस वालों को कमीशन दिए जाने का आरोप बेबुनियाद है।
हॉस्पिटल में काम करने वाले ने किया खुलासा. ऐसे चलता है निजी अस्पतालों में कमीशनखोरी का पूरा रैकेट
सूत्रों के अनुसार सरकार की चिरंजीवी योजना से संबंद्ध नहीं होने के कारण कुछ निजी हॉस्पिटल प्रबंधन सरकारी हॉस्पिटल मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस, नर्सिंग स्टाफ से सांठ-गांठ कर उनका कमीशन तय कर देते हैं और सरकारी हॉस्पिटल से निजी अस्पताल में मरीज भेजने का एंबुलेंस चालक और नर्सिंग स्टाफ को मोटा कमीशन मिलता है।

जितना गंभीर मरीज उतना ज्यादा कमीशन
शिकायतकर्ता हीरालाल ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह सिद्धि विनायक हॉस्पिटल के लिए मार्केंटिंग का काम करता था। मार्केटिंग के दौरान उसे पता चला कि आरएनटी मेडिकल कॉलेज (एमबी हॉस्पिटल) में जिन मरीजों को एंबुलेंस वाले लेकर आते हैं, उन एंबुलेंस वालों का कमीशन बंधा होता है। सरकारी हॉस्पिटल के बजाए मरीज को सिद्धि विनायक हॉस्पिटल पहुंचाने या सरकारी हॉस्पिटल में भर्ती मरीज के मोबाइल नंबर सिद्धि विनायक हॉस्पिटल को उपलब्ध करवाने पर डॉ. गजेन्द्र जोशी एंबुलेंस चालक को प्रति मरीज 5 हजार रूपए से लेकर 30 हजार रूपए तक का कमीशन देते थे। जितना गंभीर मरीज, उतना मोटा कमीशन होता था।
इसके अलावा मरीज का जो पूरा बिल बनता था, उस पर भी एंबुलेंस चालकों व वहां भेजने वाले डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ का 20 से 30 प्रतिशत कमीशन बंधा होता है। ज्यादातर मरीज एमपी, नीमच, मंदसौर, बांसवाड़ा चित्तौड़गढ़ सहित अन्य जिलों के होते हैं।
भर्ती मरीज के परिजनों से मिलकर करते हैं कन्वेंस
परिवादी हीरालाल ने बताया कि एंबुलेंस चालक या सरकारी हॉस्पिटल के कुछ नर्सिंग स्टाफ सिद्धि विनायक हॉस्पिटल प्रबंधन को सरकारी हॉस्पिटल आने वाले मरीज के परिजनों के मोबाइल नंबर उपलब्ध करवाते थे। फिर हॉस्पिटल के मार्केटिंग वाले एमबी हॉस्पिटल में भर्ती मरीज के परिजनों से मिलते थे और उन्हें किसी भी तरीके से कन्वेंस करते थे कि वे मरीज को उनके हॉस्पिटल सिद्धि विनायक में भर्ती कराएं। उस दिन जब डॉक्टर गजेन्द्र जोशी ने परिवादी हीरालाल के साथ मारपीट की तो उन्होंने भी हीरालाल को एमबी हॉस्पिटल में भर्ती दो मरीजों को सिद्धि विनायक लाने के लिए कहा था और जब यह काम नहीं हुआ तो उन्होंने मारपीट की।
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