नई दिल्ली,(एआर लाइव न्यूज)। देश के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने आज कोर्ट में “कॉम्बैटिंग जेंडर स्टीरियोटाइप्स हैंडबुक” (Combating Gender Stereotypes Handbook) जारी की। जिसमें अलग-अलग केस में महिलाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले शब्दों के बजाए उसके वैकल्पिक शब्द उपयोग करने के लिए कहा गया है।
इसमें ऐसे 100 से अधिक शब्दों की शब्दावली है, जिन्हें कोर्ट, कोर्ट प्रोसीडिंग, डिसीजन कहीं भी इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा गया है, हैंडबुक में इन शब्दों के बजाए उन वैकल्पिक शब्द में बताए गए हैं, जिन्हें कोर्ट में बोला जाना है। ऐसे में अब कोर्ट में स्लट, मिस्ट्रेस, प्रोस्टीट्यूट जैसे कई शब्द उपयोग नहीं किए जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने वेबसाइट पर अपलोड की शब्दावली
सीजेआई ने बताया कि हैंडबुक का उद्देश्य महिलाओं के बारे में लैंगिग रूढ़िवादिता को पहचानने और रोकने में न्यायाधीशों और कानूनी समुदाय की सहायता करना है। इस शब्दावली को तीन महिला न्यायाधीशों ने तैयार की है। इस पुस्तिका में 100 से अधिक शब्दों की शब्दावली है जिनका उपयोग वर्षों से भारतीय न्यायपालिका प्रणाली में किया जाता रहा है। विकल्प के तौर उन पर शब्द और वाक्यांशों का उपयोग किया जाएगा, जिनसे रूढ़िवादिता का कोई लेना-देना नहीं है।
जानकारी के अनुसार अन्य भाषाओं में भी इन शब्दों की शब्दावली जल्द ही उपलब्ध हो जाएगी, ताकि सभी राज्यों के सेशन कोर्ट में इस शब्दावली का उपयोग हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने वेबसाइट पर इस हैंडबुक को अपलोड कर दिया है।
इन शब्दों की जगह ये शब्द होंगे उपयोग : शब्दावली


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