उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। देश में आज 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस समारोह का आयोजन हो रहा है। देश का हर नागरिक सभी स्वतंत्रता सेनानियों सहित देश के लिए प्राण न्यौछावर कर सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिक को भी याद और नमन करते हैं। इसी बीच हम सबके लिए गौरव की बात है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उदयपुर के शहीद मेजर मुस्तफा बोहरा को भारत सरकार द्वारा शौर्यचक्र से सम्मानित किया गया है।
पूरे देश से इस वर्ष चुने गए 9 सोल्जर्स में एक शहदी मेजर मुस्तफा बोहरा भी हैं। मेजर मुस्तफा और उनके साथ हेलिकॉप्टर में मौजूद मेजर विकास भांम्भू ने हेलिकॉप्टर क्रैश होने से पहले ऐसा कौन सा निर्णय लिया था कि उन दोनों को मरणोपरांत शौर्यचक्र से सम्मानित किया जा रहा है। आइए जानते हैं, मेजर मुस्तफा और मेजर विकास के उस क्षण के शौर्य और बलिदान की कहानी।

जिस क्षण लोग खुद की जान बचाते हैं मेजर दूसरों को जिंदगी दे गए
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार 21 अक्टूबर 2022 को अरूणाचल प्रदेश में बोर्डर एरिया पर इंटेलीजेंस सर्विलांस मिशन के लिए रूद्र हेलिकॉप्टर से मेजर मुस्तफा बोहरा और मेजर विकास ने उड़ान भरी थी। मेजर विकास पायलट और मेजर मुस्तफा को-पायलट थे। मिशन पूरा कर जब वे बेस पर लौट रहे थे, तब बोर्डर से करीब बीच किलोमीटर पहले उनके हेलिकॉप्टर ने अचानक आग लग गयी। उन दोनों ने हेलिकॉप्टर क्रैश होने से जमीन देखी, उन्हें सबसे नजदीक जो जमीन दिखी, वह एक रिहायशी इलाका था और वहां बॉर्डर नजदीक होने के चलते सेना का काफी असला भी रखा था।
खुद के जीवन की रक्षा के लिए वे दोनों हेलिकॉप्टर से इमरजेंसी एग्जिट कर सकते थे, लेकिन तब वह हेलिकॉप्टर रिहायशी इलाके में गिरकर क्रैश होता, जहां सेना का असला भी रखा था। इससे बड़ी जनहानि हो सकती थी। हेलिकॉप्टर के क्रैश होने के अंतिम क्षणों में मेजर मुस्तफा बोहरा और मेजर विकास ने हेलिकॉप्टर को उस जगह क्रैश नहीं कर कई जिंदगियों को बचा लिया और हेलिकॉप्टर मोड़ कर दूसरी तरफ ले गए। इससे हेलिकॉप्टर हवा में ही क्रैश हो गया और दोनों मेजर शहीद हो गए।

सरकार ने उसके बलिदान को शौर्यचक्र से सम्मानित किया, हमारे लिए गौरव की बात है
उदयपुर की रहने वाली मेजर मुस्तफा की मां फातेमा ने कहा कि उन्हें उनके बेटे पर गर्व है। जीवन में जब मौत सामने होती है, तो इंसान सबसे पहले अपने जीवन की रक्षा करने को प्राथमिकता देता है, लेकिन उस क्षण मेरे बेटे ने कई लोगों की जिंदगियों को बचाने के बारे में सोचा और खुद का जीवन न्यौछावर की सर्वोच्च बलिदान दिया। उसे खुद के जीवन और उस इलाके के नागरिकों के जीवन में से किसी एक को चुनना था। उसके निर्णय पर मुझे गर्व है। मुझे हमेशा उस पर गर्व रहेगा। सरकार ने उसके सर्वोच्च बलिदान को शौयचक्र देकर सम्मानित किया है यह हम सभी के लिए गौरव की बात है।
मुस्तफा की बहन ने कहा उनके हर काम में परफेक्शन और डिसीप्लीन रहता था। उनका मानना था कि हर काम को ऐसे करो कि उसे अपने आप रिकॉग्नाइजेशन मिले। वे जाते-जाते भी अपनी इसी बात का साबित कर गए।




