- सात वर्षों की तपस्या और चार बार की असफलता के बाद मिली सफलता
- धैर्यता के साथ लगातार प्रयास करते रहने का उदाहरण बने हितेश
- देश में दसवीं रैंक हासिल कर उदयपुर का नाम किया रोशन
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। IAS/IPS/IFS बनकर देश की सेवा करना हर युवा का सपना होता है, लेकिन ये सपना पूरा उन्हीं का होता है, जो धैर्य रखकर लगातार कोशिश करते हैं और हर असफलता से सीख कर आगे बढ़ते हैं। आज हम आपको उदयपुर के ऐसे ही युवा हितेश सुथार के बारे में बताएंगे, जिन्होंने बार-बार असफलता मिलने पर हार नहीं मानी, अपनी लगातार कोशिशों के चलते यूपीएससी द्वारा आयोजित कराई गयी प्रतियोगी परीक्षा को पास कर इस बार भारतीय वन सेवा (IFS) में उनका चयन हो गया है।
उदयपुर शहर से नजदीक कानपुर गांव के रहने वाले हितेश सुथार पुत्र दयालाल सुथार का पिछले दिनों यूपीएससी द्वारा जारी किए गए परीक्षा परिणाम में भारतीय वन सेवा (IFS) में सलेक्शन हुआ है। हितेश सुथार की इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरे गांव को उन पर नाज है, क्यों कि कानपुर गांव से पहली बार कोई युवा आईएफएस बना है।
सात वर्षों से कर रहे तैयारी, पांच बार परीक्षा दी, दो बार इंटरव्यू तक गए
हितेश ने बताया कि उदयपुर के निवासी हैं, ऐसे में प्रकृति और वाइल्ड लाइफ के वे हमेशा करीब रहे हैं। इसलिए वे हमेशा से ही भारतीय वन सेवा में जाना चाहते थे। पिता दयालाल सुथार मार्बल फिटिंग का काम करते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार जैसी ही है, ऐसे में 2012 में टेक करने के बाद उन्होंने चार वर्ष प्राइवेट कंपनी में जॉब किया। लेकिन उनका सपना आईएफएस बनना ही था।
ऐसे में उन्होंने 7 वर्ष पहले अपना उद्देश्य तय किया और फोकस होकर तैयारी में जुट गए। हितेश कहते हैं कि सफलता के लिए आपका अल्टीमेट गोल सेट करना जरूरी है। मैंने भी यही किया, सही गाइडेंस के लिए कुछ महीने एक कोचिंग जॉइंन की। इसके बाद सेल्फ स्टडीज करता रहा।
हर बार की असफलता से सीखा और आगे बढ़ा
हितेश बताते हैं कि वे सात वर्षों से लगातार आईएफएस की तैयारी कर रहे हैं। इस दौरान वे पांच बार यह परीक्षा दे चुके थे। पहली दो बार में उनका प्री में चयन नहीं हुआ तो उन्होंने खामियों को समझा और तैयारी के तरीके को थोड़ा बदला। तीसरी बार में उनका मेन्स के लिए चयन हुआ, लेकिन इंटरव्यू तक नहीं पहुंच पाए। उन्होंने तैयारी जारी रखी, पिछले प्रयास में उनका इंटरव्यू के लिए सलेक्शन हो गया था, लेकिन उनका फाइनल सलेक्शन नहीं हुआ था।
हितेश बोले कि पिछले सात वर्षों में उन्होंने हर बार मिली असफलता से सीखा और खामियों को दूर कर तैयारी जारी रखी। इस बार उन्होंने स्टेप बाई स्टेप प्री, मेन्स और इंटरव्यू पास किए और अब उनका आईएफएस के लिए चयन हो गया है। वे अब कैडर मिलने और ट्रेनिंग पर जाने की तारीख का इंतजार कर रहे हैं।

शादी के बाद भी नहीं बदला गोल
ज्यादातर युवाओं के शादी के बाद गोल बदल जाते हैं, वे पारिवारिक जिम्मेदारियों में आकर उनके सपने को पीछे छोड़ देते हैं। लेकिन हितेश ने ऐसा नहीं किया, शादी के बाद भी वे तैयारी में जुटे रहे। हितेश ने कहा कि उनकी पत्नी अंजना ने हमेशा सपोर्ट और मोटीवेट किया। उनकी मां प्रेमलता और पिता दयालाल सुथार ने हमेशा उन्हें तैयारी पर फोकस करने को कहा और प्रोत्साहित किया।
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