भोपाल,(एआर लाइव न्यूज)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मध्यप्रदेश में कार्यकर्ताओं को संबोधित किया, इस दौरान उन्होंने यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि देश दो कानूनों के साथ काम नहीं कर सकता है, जबकि संविधान सभी के लिए समानता का अधिकार देता है।
पीएम मोदी ने इस्लाम में तीन तलाक की प्रथा को लेकर कहा कि इस्लाम और तीन तलाक का कोई संबंध नहीं हैं, क्यों कि अगर ये इस्लाम में जरूरी होता तो पाकिस्तान, बांग्लादेश, मिस्र, इंडोनेशिया, कतर, जॉर्डन, सीरिया जैसे मुस्लिम बहुल देशों में तीन तलाक क्यों नहीं है। सुन्नी मुस्लिम बाहुल्य मिश्र में तो 80-90 साल पहले तीन तलाक की प्रथा समाप्त हो चुकी है। पीएम मोदी ने मंगलवार को भोपाल में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा एक ही परिवार में अलग-अलग सदस्य पर अलग-अलग नियम हों, तो क्या वह परिवार चलेगा, तो दो अलग-अलग कानूनों के साथ एक देश कैसे चलेगा। सुप्रीम कोर्ट भी कॉमन सिविल कोड लाने की बात कह चुका है।
कुछ लोग समान नागरिक संहिता को लेकर भ्रम फैला रहे हैं
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुस्लिम बेटियों के लिए चिंता व्यक्त की और तीन तलाक की वकालत करने वालों की आलोचना करते हुए वोट बैंक की राजनीति को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। लोग मुस्लिम बेटियों के साथ बहुत बड़ा अन्याय कर रहे हैं। तीन तलाक से नुकसान का दायरा बड़ा है। बहुत अरमानों से पिता अपनी बेटी को ससुराल भेजता है। 8-10 साल बाद बेटी वापस आती है, तो उसका भाई, पिता सब उसकी चिंता में दुखी हो जाते हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि कुछ लोग समान नागरिक संहिता को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, बीजेपी इस भ्रम को दूर करेगी। समान नागरिक संहिता में कानूनों का एक सामान्य सेट शामिल होता है, जो सभी नागरिकों पर लागू होता है। इसमें व्यक्तिगत कानूनों के साथ-साथ विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार से संबंधित कानून भी शामिल हैं। उत्तराखंड सहित कुछ राज्यों ने पहले ही अपने स्वयं के सामान्य कोड बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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