- टाइगर को रणथंभोर ट्रेंकुलाइज करने से लेकर उदयपुर सज्जनगढ बायोलॉजिकल पार्क शिफ्ट करने के बीच क्या बरती गयीं लापरवाहियां
- टाइगर 104 पर रणथंभोर में साढे तीन सालों में तीन लोगों को मारने का आरोप था
- आठ साल पहले जिस तरह टाइगर टी-24 को रणथंभोर से सज्जनगढ़ बायोपार्क शिफ्ट (कथित जेल की सजा की तरह) किया था, टाइगर टी-104 को भी वैसे ही सज्जनगढ बायोपार्क भेजा गया था.?
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। रणथंभोर नेशनल पार्क से उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क लाया गया टाइगर टी-104 दस घंटे भी जिंदा नहीं रह पाया। टाइगर की मौत के बाद से ही वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। जितने संदिग्ध हालातों में टाइगर की सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में मौत हुई, विभागीय अधिकारी उतने की संदिग्ध तरीके से मौत के कारणों और हालातों को छुपाने में लगे हुए हैं।
मौत के 12 घंटे से ज्यादा बीत जाने के बाद भी वन विभाग के अधिकारी यह नहीं बता पा रहे हैं कि आखिरकार रणथंभोर से लाए गए साढ़े छह साल के स्वस्थ टाइगर के साथ हुआ क्या। 5 डॉक्टर्स के मेडिकल बोर्ड ने टाइगर का पोस्टमार्टम किया और मौत का कारण मल्टीपल फेल्योर पाया है। लेकिन यह बात कोई बताने को तैयार नहीं है कि टाइगर के अचानक मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर कैसे हो गए.? जबकि वह पूरी तरह स्वस्थ था, तभी तो उसे उदयपुर शिफ्ट किया गया। और अगर वह स्वस्थ नहीं था, तो उसे रणथंभोर से उदयपुर शिफ्ट कैसे कर दिया गया.? रणथंभोर से उदयपुर लाते समय रास्ते में टाइगर के साथ घटित हुए हर पल की सच्चाई क्या कभी सामने आएगी।
उठ रहे हैं बड़े सवाल : रणथंभोर से उदयपुर लाते समय क्या हुआ था टाइगर के साथ.?
- टाइगर को ट्रेंकुलाइज करने के लिए दी गयी डोज की मात्रा की जांच होगी क्या.?
- रणथंभोर से उदयपुर लाते समय रास्ते में क्या टाइगर को होश आया था.?
- रणथंभोर से उदयपुर लाते समय टाइगर को कितनी बार ट्रेंकुलाइज किया गया.?
- टाइगर के उदयपुर पहुंचने और एनक्लोजर में रिलीज करने के दौरान कितने घंटे का अंतराल रहा है।
- टाइगर को जिस एयरकंडीशन व्हीकल से लाया गया, क्या उसके एसी की जांच होगी क्या.?
- टाइगर की अचानक हुई मौत में किसकी लापरवाही रही है।
- राजस्थान वन विभाग की जांच के अलावा क्या एनटीसीए भी इस मामले में जांच कराएगा
टाइगर को रिलीज करते समय पूरा प्रशासनिक अमला था, बस एनटीसीए के मेंबर को नहीं बताया
रणथंभोर टाइगर रिजर्व के बाघ टी-104 को मंगलवार को रणथंभोर में ट्रेंकुलाइज किया गया था। प्रोटोकॉल के तहत मेडिकल जांच के बाद उसे गाड़ी में लिया गया और रणथंभोर से उदयपुर के सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के लिए रवाना कर दिया गया था। उदयपुर पहुंचने पर मंगलवार रात करीब 8.30 बजे टाइगर को नॉन डिस्प्ले एरिया के एनक्लोजर में छोड़ा गया। टाइगर एनक्लोजर में जाते ही वाटर पॉन्ड में बैठ गया। वन विभाग द्वारा बताया गया कि उस समय तक उसकी एक्टिविटी सामान्य थी।
यहां गौर करने वाली बात यह भी है कि जब टाइगर को एनक्लोजर में छोड़ा गया, उस समय उदयपुर के संभागीय आयुक्त राजेन्द्र भट्ट, कलेक्टर ताराचंद मीणा, एसपी विकास शर्मा, मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह सहित वन विभाग उदयपुर में पदस्थ सभी उप वन संरक्षक सहित अन्य आलाधिकारी व कर्मचारी मौजूद थे। लेकिन उदयपुर में मौजूद नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी NTCA के सदस्य राहुल भटनागर को न तो सूचित किया गया और न ही कोई राय ली गयी।
जबकि 2015 में इसी प्रकार रणथंभोर के चर्चित टाइगर टी-24 को सज्जगनढ़ बायोलॉजिकल पार्क शिफ्ट किया गया था, उस समय राहुल भटनागर उदयपुर में सीसीएफ वाइल्ड लाइफ थे और टी-24 के सज्जनगढ़ बायोपार्क में हुई सफल शिफ्टिंग उन्हीं के नेतृत्व में हुई थी। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) के सदस्य राहुल भटनागर ने बताया कि उन्हें टाइगर को सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में रिलीज करने या उसकी मौत की कोई अधिकृत जानकारी वन विभाग से नहीं दी गयी है। उन्होंने कहा जब मौका देखा ही नहीं, तो इस मामले में कोई कमेंट नहीं कर सकता।
वन विभाग का यह कहना है
उप वन संरक्षक वन्यजीव अजय चित्तौड़ा ने बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव आरके खैरवा, जिला परिषद एसीईओ विनय पाठक तथा पुलिस की ओर से प्रतिनिधि के रूप में एसएचओ रवीन्द्र मौजूद रहे। इसके अलावा मौके पर डॉ आरके गर्ग, डॉ हंस कुमार जैन, डॉ हिमांशु व्यास, डॉ करमेन्द्र प्रताप, डॉ सविता मीणा, वरिष्ठ पशुचिकित्सा अधिकारी एवं सज्जनगढ़ रेंज का स्टॉफ उपस्थित रहे। गठित टीम द्वारा बताया गया कि टाईगर 104 में मल्टी ऑर्गन संकमण पाया गया। इनके सैम्पल एकत्रित कर जांच के लिए भिजवाये जा रहे है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने पर ही मृत्यु के सही कारणों का पता चल पाएगा।
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