- होटल-रिसोर्ट से संबंधित वेलेंसिया, एचजी ऐसरेज डवलपर्स, विजेन्द्र चौधरी, उदयपुर, राजसमंद कलेक्टर सहित राज्य सरकार को भी बनाया पार्टी
- नदी/नाला का बहाव रूकने से किनारे बसे गांवों के हजारों ग्रामीणों के सामने खड़ा हुआ पानी का संकट
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर जिले के कैलाशपुरी क्षेत्र में राया गांव स्थित पिछले महीने 25 मार्च को आईटीसी ग्रुप द्वारा संचालित मेमेंटोज होटल एंड रिसोर्ट (mementos udapiur hotel and resort) की शुरूआत हुई है। यहां होटल एंड रिसोर्ट के निर्माण और शुरूआत के साथ ही कई विवाद जुड़ गए हैं। यहां तक कि प्राकृतिक नदी/नाला के बहाव को रोककर उस पर कब्जा करने, नदी के अंदर ही सड़क बना देने सहित प्रकृति और कैचमेंट एरिया को नुकसान पहुंचाने के आरोपों का मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) तक पहुंच गया है।
प्रकृति को पहुंचे इस नुकसान से हजारों ग्रामीणों के सामने पेयजल और सिंचाई संकट खड़ा हो गया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने इस मामले में गंभीरता से लिया है और संबंधित पार्टियों को नोटिस जारी कर दिए हैं। एनजीटी की सेंट्रल ज़ोन बेंच ने दाखिल हुई याचिका पर इस होटल एंड रिसोर्ट से संबंधित वेलेंसिया(Valencia), एचजी ऐसरेज डवलपर्स (HG ACERAGE Developers), एचजी ऐसरेज के निदेशक विजेन्द्र चौधरी, सहित उदयपुर कलेक्टर, राजसमंद कलेक्टर, राज्य सरकार के संबंधित जल संसाधन विभाग, पर्यावरण विभाग, खान विभाग सहित संबंधित जिम्मेदारों को नोटिस जारी किए हैं और जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रेल को है।
दो जिलों की सीमाओं में आता है यह होटल-रिसोर्ट
गौरतलब है कि इस होटल एंड रिसोर्ट को वेलेंसिया लीजर(Valencia Leisures) और एचजी ऐसरेज डवलपर्स (HG ACERAGE Developers) द्वारा बनाया गया है, जिसके निदेशक विजेन्द्र चौधरी हैं। वर्तमान में होटल-रिसोर्ट का संचालन और प्रबंधन देश का बड़ा होटल ग्रुप आईटीसी ग्रुप (ITC group) देख रहा है और आईटीसी ग्रुप ने इसे मेमेंटोज उदयपुर नाम दिया है, जिसकी शुरूआत इसी साल 25 मार्च को हुई है। यह होटल एंड रिसोर्ट उदयपुर के कैलाशपुरी पंचायत में राया गांव और राजसमंद के गोड़च पंचायत में गांव घाटी का मठ की सीमा में स्थित है।
रिसोर्ट में पर्यटकों को लुभाने के लिए नदी के बहाव को रोककर किया कब्जा
आरोप है कि होटल एंड रिसोर्ट की खूबसूरती बढ़ाने और निजी लाभ के लिए पर्यटकों को लुभाने के लिए होटल मालिकों ने बहती हुई प्राकृतिक नदी/नाला पर न सिर्फ कब्जा कर लिया है, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ कर वहां मनमाफिक खुदाई की गयी और उसके पानी के बहाव को रोकने के लिए एनीकट को उंचा कर दिया है, ताकि होटल-रिसोर्ट के करीब से गुजरती नदी/नाला में पानी हमेशा भरा दिखे। पर्यावरण को नुकसान पहुंचने के साथ ही इसका नतीजा यह हुआ है कि इस नदी के जरिए गंधारा सागर तालाब तक आवश्यकतानुसार पानी नहीं पहुंच पा रहा है और ग्रामीणों के सामने पेयजल और सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है।
नदी के अंदर बना दी सड़क, किनारे बसे कई गांव हो रहे प्रभावित
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन लोगों ने होटल तक पहुंचने के लिए नदी के अंदर ही सड़क बना दी है। इससे नदी/नाला का रास्ता और बहाव रूक गया है। नदी के किनारे-किनारे बसे कई गांवों के हजारों ग्रामीण पेयजल और खेतों की पिलाई के लिए के लिए इसी नदी पर निर्भर हैं, जिनके सामने अब संकट खड़ा हो गया है। एनजीटी में दाखिल हुई याचिका में इस तथ्य को भी उजागर किया गया है कि इस होटल-रिसोर्ट के निर्माण में पर्यावरणीय मंजूरी भी नहीं ली गयी है। यहां तक कि यहां पर अवैध माइनिंग भी की गयी।
रसूखदार हैं, इसलिए नहीं होती हमारी सुनवाई
ग्रामीणों का कहना है कि यह होटल-रिसोर्ट बनाने वाले बहुत रसूखदार है। हमने इनके के खिलाफ सैकड़ों एप्लीकेशन प्रशासन और संबंधित विभागों को दी हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं होती। ग्रामीणों की मांग है कि नदी/नाला के रास्ते में डाला गया भराव हटे औरइसे वापस इसके पुराने स्वरूप में लाया जाए।
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