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दया याचिका में अत्यधिक देरी से मौत की सजा का मकसद ही खत्म हो जाएगा : सुप्रीम कोर्ट

AR Live News Reporter by AR Live News Reporter
April 14, 2023
Reading Time: 1 min read
supreme court


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नई दिल्ली (एआर लाइव न्यूज)। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एक सख्त टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट(Supreme Court) ने कहा है कि दया याचिका पर फैसला करने में अत्यधिक देरी से मौत की सजा का उद्देश्य विफल हो जाएगा। इसलिए राज्यों व सक्षम अधिकारियों द्वारा दया याचिका पर जल्द से जल्द फैसला लिया जाए।

जस्टिस एम आर शाह और सी टी रविकुमार की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई की। महाराष्ट्र सरकार ने यह याचिका रेणुका और उसकी बहन सीमा को दी गई मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदलने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मौत की सजा पाने वाले कैदियों की दया याचिका (mercy petition) पेंडिंग रहने से उन्हें इसका फायदा मिल रहा है। दया याचिका के नाम पर मौत की सजा के मामलों में देरी हो रही है। इससे उम्रकैद में सजा तब्दील कराई जा रही है। और इसी तरह रहा तो सजा-ए-मौत का मकसद ही खत्म हो जाएगा।

ये था मामला

रेणुका और उसकी बहन सीमा ने मिलकर कोल्हापुर में 1990 और 1996 के बीच 13 बच्चों का अपहरण किया। उनमें से 9 बच्चों को मार डाला। 2001 में कोल्हापुर की एक अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई। 2004 में हाई कोर्ट ने सजा को बरकरार रखा। 2006 में दोनो बहनों की अपील को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद 2022 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने दोनों बहनों की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। जिसके खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

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बचपन से ही माँ के साथ मिलकर किये अपराध

कोल्हापुर में अंजना गवित की बेटी रेणुका हुई तो उसके पति ने उसे छोड़ दिया। उसने मोहन नाम के शख्स से शादी की लेकिन सीमा के पैदा होने के बाद मोहन ने भी प्रतिमा नाम की दूसरी महिला से शादी कर ली। जिसके बाद अंजना दोनों बेटियों सीमा और रेणुका के साथ मिलकर भीड़-भाड़ वाले इलाके, धार्मिक स्थानों पर छोटी-मोटी चोरी और चेन-स्नैचिंग करने लगी।

बच्चों का अपहरण कर उनसे मंगवाती थी भीख

रेणुका शिंदे एक मंदिर में महिला को लूटने की कोशिश करते हुए पकड़ी गई थी। लेकिन उसके साथ एक साल का बच्चा था, इसलिए वह लोगों ने उसे छोड़ दिया। इसके बाद से मां-बेटियों की तिकड़ी ने बच्चों की आड़ में अपराध करने शुरू कर दिए। शिशु और 12 साल से कम उम्र के करीब बच्चों का अपहरण कर उनको भीख मांगने, चोरी करने में लगाती थीं। जब भी वह पकड़ी जाती अपहृत बच्चों की आड़ लेकर भाग जाती।

तीन दर्जन से अधिक बच्चों का किया था अपहरण

1996 में अंजना ने रेणुका और सीमा के साथ मिलकर अपने पूर्व पति मोहन और प्रतिमा की बेटी की हत्या की। उनकी दूसरी बेटी को मारने की प्लांगि के दौरान पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया गया। रेणुका का पति किरण भी मोहन और प्रतिमा की बेटी की हत्या में शामिल था लेकिन वह सरकारी गवाह बनाया गया। घर पर छापा मारने पर कई बच्चों के कपड़े और खिलौने मिले। दोनों बहनों ने 1990 से लेकर 1996 तक तीन दर्जन से अधिक बच्चों का अपहरण किया। पुलिस ने इनमें से केवल संतोष, बंटी, स्वाति, गुड्डू, मीना, राजा, श्रद्धा, क्रांति, गौरी और पंकज के अपहरण को साबित कर सकी। और इनमे से भी सिर्फ संतोष, श्रद्धा, गौरी, पंकज और अंजलि की नृशंस हत्याएं साबित हुईं। गिरफ्तारी के एक साल बाद, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अंजना की जेल में मृत्यु हो गई।

Tags: Bombay high courtInordinate delay in mercy petition will defeat the purpose of death sentencekiller sisters renuka and seemamaharashtra governmentmercy petitionrenuka and seema casesupreme court

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