साइबर अपराध के दर्ज मामलों में मात्र 29 प्रतिशत केस का ही खुलासा कर पाती है पुलिस
लकी जैन,(एआर लाइव न्यूज)। देश में केन्द्र और राज्य की सरकारें भले ही डिजीटल इंडिया के नारे लगाती हों, लेकिन डिजीटल व साइबर एजुकेशन के मामलों में आम नागरिक की नॉलेज तो जीरो है ही, हमारी पुलिस भी बहुत ज्यादा एक्सपर्ट नहीं है। प्रदेश पुलिस खुद को अपडेट तो कर रही हैए लेकिन अब भी अपराधियों से काफी पीछे है। (Cyber crime in rajasthan) यही कारण है कि देश-प्रदेश में साइबर अपराध के मामले तो लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन पुलिस का इन मामलों के खुलासे में सक्सेस रेट काफी कम है।
गृह विभाग से प्राप्त आंकड़ों पर गौर किया जाए तो बीते चार वर्षों में राजस्थान में साइबर अपराध के 6620 प्रकरण दर्ज हुए हैं, लेकिन पुलिस मात्र 1901 मामलों में ही चालान पेश कर पायी है। मतलब साइबर क्राइम का खुलासा कर उसमें अपराधी के खिलाफ चालान पेश करने का सक्सेस रेट मात्र 29 प्रतिशत ही है।

प्रदेश के पांच जिलों में साइबर अपराध सबसे ज्यादा
बीते चार वर्षों में साइबर अपराध के प्रदेश भर में कुल 6620 मामले दर्ज हुए हैं, इसमें सर्वाधिक मामले जयपुर, जोधपुर, अलवर, सीकर, अजमेर और भरतपुर जिलों में दर्ज हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार बीते चार वर्षों में जयपुर कमिश्नरेट के पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण एरिया और जयपुर ग्रामीण कुल मिलाकर जयपुर में 1596 प्रकरण साइबर अपराध के दर्ज हुए हैं। वहीं जोधपुर कमिश्नरेट के पूर्व, पश्चिम क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र मिलाकर कुल 670 प्रकरण, अलवर में 435, सीकर में 394, अजमेर में 369 और भरतपुर में 326 मामले साइबर अपराध के दर्ज हुए हैं।

डूंगरपुर, बांसवाड़ा में सबसे कम साइबर क्राइम
आंकड़ों के ट्रेंड में गौर करने की एक बात यह भी है कि जहां स्मार्ट फोन, इंटरनेट यूज जितना ज्यादा है, वहां साइबर अपराध भी ज्यादा है। जिन जिलों में टोपोग्राफी या अन्य कारणों से इंटरनेट यूज सीमित है, वहां अपराध भी अन्य जिलों की तुलना में थोड़ा कम है।
आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में साइबर अपराध के सबसे कम प्रकरण डूंगरपुर जिले में दर्ज हुए हैं। यहां बीते चार वर्षों में मात्र 9 मामले दर्ज हुए हैं, वहीं संभाग के अन्य जिले बांसवाड़ा में 28, प्रतापगढ़ में 33 मामले साइबर अपराध के दर्ज हुए हैं। ये क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र हैं, यहां की टोपोग्राफी के चलते कई हिस्सों में तो पर्याप्त इंटरनेट नहीं है, आर्थिक दृष्टि से जीवन स्तर ज्यादा बेहतर नहीं है, इससे स्मार्ट फोन का उपयोग भी कम है। ऐसे में यहां साइबर अपराध भी कम है।
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