- शिवभक्तों ने कहा बर्दाश्त नहीं करेंगे शिव का अपमान
- संतों ने तर्क दिया कि भगवान शिव के सिर पर चढ़कर जलाभिषेक करना, ये भक्ति नहीं, दिखावा और अपमान है।
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। श्रीजी की नगरी नाथद्वारा में 29 अक्टूबर को विश्व की सबसे ऊंची 369 फीट ऊंची शिव प्रतिमा “विश्वास स्वरूपम” (स्टूच्यू ऑफ बिलीफ) का लोकार्पण हुआ है, लेकिन इसी के साथ शिव प्रतिमा स्थल के प्रबंधन का विरोध भी शुरू हो गया है। मूर्ति पर लोग जूते-चप्पल पहन कर चढ़ रहे हैं, यह देखकर शिव भक्तों और संतों में भारी रोष है।
शिव भक्तों ने यहां तक कह दिया है कि शिव हमारे ईष्ट है और शिव का अपमान हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। अगर मूर्ती प्रबंधन ने व्यवस्था नहीं सुधारी, तो इनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन होगा। भक्तों ने कहा कि जूते-चप्पल लोग खुद के बाहर से पहन कर आएं या प्रतिमा स्थल पर उन्हें अलग से उपलब्ध हों, जूते-चप्पल तो हैं ही।
संतों और शिव भक्तों ने कहा कि भगवान को भगवान ही रहने दो, प्रदर्शनी मत बनाओ। कोई उनके कमर पर तो कोई उनके हाथ पर पैर रखकर फोटो खिंचा रहा है। लोग भगवान शिव की चोटी पर खड़े हैं। कहीं तो मर्यादा रखो। जूते-चप्पल पहनकर भगवान शिव पर चढ़ रहे हैं, यह सब देखकर मन आहत है। संतों ने यह भी तर्क दिया कि भगवान शिव के सिर पर चढ़कर जलाभिषेक करना, ये भक्ति नहीं, दिखावा और अपमान है।

गौरतलब है कि शिव प्रतिमा का निर्माण संत कृपा सनातन संस्थान द्वारा किया गया है, जिसके ट्रस्टी मिराज ग्रुप के फाउंडर मदन पालीवाल हैं। शिव प्रतिमा के अंदर हॉल बनाया गया है, प्रतिमा के ऊपरी हिस्से में जाने के लिए 4 लिफ्ट और तीन सीढ़ियां हैं। इन लिफ्ट और सीढ़ियों के जरिए कोई भी व्यक्ति शिव प्रतिमा के अंदर से शिव की चोटी तक पहुंचेगा।
जानिए…. क्या कहा संतों और शिव भक्तों ने
भगवान शिव की चोटी पर चढ़ना भक्ति नहीं, अपमान है
सर्व सम्प्रदाय संत संस्थान के अध्यक्ष और हरिदास जी की मगरी स्थित श्री स्वामी चर्तुभुज हनुमान मंदिर के महंत इन्द्र देव दास ने कहा कि भगवान को भगवान रहने दो, प्रदर्शनी मत बनाओ। भगवान शिव की प्रतिमा की चोटी पर लोग चढ़ रहे हैं, कोई कमर पर पैर रखकर फोटो खिंचा रहा है, कोई हाथ पर पैर रख रहा हैं। जूते-चप्पल पहन कर लोग चढ़ रहे हैं। यह सब देखकर मैं बहुत ही आहत हुआ हूं। शिव प्रतिमा के अंदर लोगों का प्रवेश वर्जित करना होगा, वरना संत समाज इसका विरोध करेगा।
शिव भक्त शिव दल मेवाड़ के संस्थापक मनीष मेहता ने बताया कि मैं पहले दिन से ही यह देखकर आहत हूं कि शिव प्रतिमा के अंदर लोग जा रहे हैं, भगवान शिव की चोटी पर खड़े हैं और जूते चप्पल पहन कर वहां चढ़े हैं। मैंने सोशल मीडिया पर इसका विरोध किया था और अगर प्रतिमा प्रबंधन ने व्यवस्था नहीं सुधारी ने हम सड़कों पर आकर इसका विरोध करेंगे।
लोगों को दर्शन करने हैं, तो बाहर से करो
मेवाड़ मंडल छड़ीदार के संत गोपाल जी महाराज ने कहा कि हमारा धर्म सनातन है और महादेव हमारे इष्ट हैं और इष्ट का अपमान हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। महादेव की प्राणप्रतिष्ठा हुई, रामकथा हो रही हम खुश है, लेकिन मंदिर में ऐसे बनाकर कोई जूते-चप्पल पहन कर चढ़ेगा, तो हम यह सब बर्दाश्त नहीं करेंगे। कहीं महादेव की प्रतिमा छोटी है, तो कहीं खूब बड़ी और विराट भी है, उसमें कोई फर्क नहीं है। लोगों को दर्शन करने हैं, पूजा करनी है, सब बाहर से करें। हमारे मंडल में 400 साधू हैं और हम सभी मिलकर इसका विरोध करेंगे।
धूणी माता मंदिर मंडल के कुबेर भंडारी चेतनानंद महाराज ने बताया कि ऐतिहासिक शिव प्रतिमा के चोटी तक जाना तो दूर, शिव प्रतिमा के अंदर लोगों का प्रवेश बंद होना चाहिए। मर्यादा हमारे सनातन धर्म की है। शिव प्रतिमा के अंदर से कोई रास्ता नहीं होना चाहिए और वहां जूते चप्पल वर्जित होने चाहिए।
प्रतिमा को शिव स्वरूप माना है, वहां चप्पल, जूते पहन कर जाना गलत है
नाथ संप्रदाय के सरसुनिया आश्रम के महंत हरिनाथ जी महाराज ने कहा कि यह श्रद्धा का विषय है, शिव प्रतिमा का विषय है, जब प्रतिमा को शिव स्वरूप माना है, तो हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार चप्पल, जूते, मोजे और बेल्ट पहन कर जाना वर्जित होना चाहिए।
यह रामेश्वर की स्थापना है, नियम निभाकर ही उपर तक जाएंगे लोग

शिव प्रतिमा का लोकार्पण करने वाले संत मुरारी बापू से जब मीडिया ने इस संबंध में सवाल किए तो उन्होंने कहा कि मूर्ति के अंदर लोग जूते पहनकर नहीं जाएंगे। या तो लोग उपर जाएंगे ही नहीं या फिर सभी नियम निभाकर जाएंगे। यह शिव मूर्ति रामेश्वर की स्थापना है। यह धर्म को जोड़ेगी, यह सेतु बनेगी।


