- बदमाशों ने वारदात से पहले उज्जैन जाकर महाकाल के दर्शन भी किए
- गिरफ्तार हुए बदमाश पर बिहार में पुलिसकर्मी की हत्या का केस भी दर्ज है
- वारदात से पहले फर्जी आधार कार्ड और नाम से 15 दिन उदयपुर में रहे और रैकी की
- लूटा गया सोना पड़ोसी देश में बेचने की थी योजना
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। सुंदरवास स्थित मणप्पुरम गोल्ड लोन कंपनी में 29 अगस्त को हुई साढे़ 23 किलो सोना और 10 लाख रूपए की डकैती मामले में उदयपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। उदयपुर पुलिस ने डकैती में शामिल 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। डकैती डालने वाली गैंग बिहार की रहने वाली है। रोचक बात सामने आयी है कि ये डकैत महाकाल के बड़े भक्त हैं और वारदात करने से पहले इन्होंने उज्जैन जाकर महाकाल के दर्शन किए थे।
आईजी प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि बिहार के वैशाली निवासी प्रिंस कुमार उर्फ सूरज और फंटूस कुमार उर्फ मनोज को गिरफ्तार किया है। दोनों ही बदमाश बहुत शातिर और पेशेवर हैं। प्रिंस पर पूर्व में भी हत्या, लूट के मामले चल रहे हैं। खासबात है कि पकड़े गए आरोपी वारदात से पहले 15 दिन उदयपुर में रहे और यहां मणप्पुरम गोल्ड लोन की बारीकी से रैकी की। इन्होंने बिहार में ही फर्जी आधारकार्ड बनवाए थे, फर्जी आधारकार्ड और फर्जी नाम के साथ के उदयपुर के डबोक क्षेत्र में किराए पर कॉलेज स्टूडेंट बनकर 15 दिन रहे।
वारदात करने वाले बदमाशों को 50 लाख से 1 करोड़ रूपए मिलना था

एसपी विकास शर्मा ने बताया कि गिरोह के सरगना (मुख्य सूत्रधार) सहित वारदात में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है, ताकि जल्द से जल्द लूटे गए सोने की रिकवरी हो सके। प्रिंस से लूट में उपयोग हुई पिस्टल और कारतूस बरामद कर लिए गए हैं। वारदात के मुख्य सूत्रधार गिरोह का सरगना ने इन दोनों को लूट करने के लिए 50 लाख रूपए से 1 करोड़ रूपए देने का लालच दिया था।

बदमाशों को एक-दूसरे के असली नाम तक नहीं पता, सबके कोड नेम
एडि.एसपी चन्द्रशील ठाकुर ने बताया कि इस पूरी वारदात को बदमाशों ने बहुत ही शातिर तरीके से अंजाम दिया था। उदयपुर से पहले 6 अगस्त को इन्होंने उड़ीसा में भी एक गोल्ड लोन कंपनी में इसी तरह वारदात करने का प्रयास किया था, लेकिन अलार्म बजने से वारदात नहीं सके थे। वहीं इन्हें पूर्व में की गयीं वारदातों से इस बात की जानकारी थी, कि कंपनी में जमा सोने में जीपीएस सिस्टम लगा होता है। ऐसे में ये जब उदयपुर में वारदात करने आए तो इस सिस्टम को डी-एक्टिवेट करने का सिस्टम साथ लाए थे। अलार्म सिस्टम की रैकी भी की थी।
पुलिस के लिए सरगना तक पहुंचना अभी भी चुनौती, क्यों कि उसे कोई नहीं जानता
पुलिस ने बताया कि इस वारदात की योजना जिस मुख्य बदमाश (सरगना) ने बनाई, उसने नियम रखा था कि कोई किसी को असली नाम-पहचान से नहीं जानेगा। डकैती में शामिल पांचों आरोपी उदयपुर में कोड नेम से रहे, मास्टर माइंड ने उसका नाम गुड्डू रखा था। गिरफ्तार हुए प्रिंस का कोड नेम सूरज और फंटूस का मनोज था। सरगना के अलावा किसी भी बदमाश को साथी बदमाश का असली नाम-पता नहीं पता था। मुख्य सूत्रधार का असली नाम पकड़े गए आरोपियों को भी नहीं पता है। ऐसे में पुलिस के लिए उस तक पहुंचना अभी भी मुश्किल टास्क है और लूटा गया सोना उसी के पास है।
आरोपियों ने उनके फर्जी आधारकार्ड के जरिए ही कोटा से बाइक खरीदी थी, जिन्हें लूट में इस्तेमाल किया और फर्जी आईडी पर ही पश्चिम बंगाल से सिम खरीदी थीं।

मुख्य बिंदू..इंटरनेट पर सर्च करते गोल्ड लोन कंपनी और लोकेशन
- गिरोह का मुख्य सूत्रधार इंटरनेट फ्रेंडली है। वह इंटरनेट पर गोल्ड लोन कंपनियों को सर्च करता है और फिर उनकी लोकेशन चेक करता है। जो गोल्ड लोन कंपनी हाईवे से नजदीक होती है, या मुख्य सड़क से उसकी अप्रोच आसान होती है, ये उसी गोल्ड लोन कंपनी को टारगेट करते हैं।
- वारदात से पहले 15 दिन रैकी करते हैं, इसमें ग्राहकों और कर्मचारी के आने-जाने का समय, सिक्योरिटी सिस्टम सहित हर चीज की बारीकी से रैकी करते हैं।
- 15 दिन के अंदर ही हाईवे से जुड़े गांवों के कच्चे रास्ते भी चिह्नित कर लेते हैं और हाईवे से सीधे फरार होने के बजाए हाईवे से कनेक्टेड गांवों के कच्चे रास्तों के जरिए भागे थे।
- उदयपुर से बदमाश अलग-अलग रास्तों से नीमच पहुंचे। नीमच से उज्जैन और फिर उज्जैन से दिल्ली और दिल्ली से बिहार गए थे।
- वारदात के बाद कोई बदमाश साथी बदमाश के संपर्क में नहीं था।
- पकड़े गए बदमाश भी मुख्य सूत्रधार बदमाश का मैसेज आने का इंतजार कर रहे थे, ताकि वे उनका हिस्सा ले सकें।
आरोपियों की गिरफ्तारी में एसपी विकास कुमार के निर्देशन, एडि.एसपी चन्द्रशील ठाकुर के नेतृत्व में प्रतापनगर थानाधिकारी दर्शन सिंह, अंबामाता थानाधिकारी रविन्द्र चारण, सुखेर थानाधिकारी संजय शर्मा, इंस्पेक्टर दिलीप सिंह और इनकी अधिनस्थ टीम सहित बिहार एसटीएफ के एसपी राजीव रंजन और इंस्पेक्टर अलय की मुख्य भूमिका रही। आरोपियों की पहचान में सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच बहुत महत्वपूर्ण रही।




