219 बांधों में मानसून पूर्व 32 फीसदी पानी ही था
देवेंद्र शर्मा, उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। इस साल 1 जुलाई को मेवाड़ में दस्तक देकर मानसून ने 3 अक्टूबर को मेवाड़ सहित पूरे राजस्थान से विदाई ले ली। मेवाड़ में मानसून शुरूआती दौर में भले ही कमजोर रहा, लेकिन बाद में खूब मेहरबानी बरसायी। उदयपुर शहर की दो प्रमुख झीलों फतहसागर और पीछोला सहित विश्वविख्यात जयसमंद पर भी चादर चल गई। हालांकि राजसमंद झील में इस बार उम्मीद अनुरूप पानी नहीं आया। उदयपुर के मावली क्षेत्र में स्थित बागोलिया तालाब भी खाली रह गया।
जलसंसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 219 बांधों में वर्तमान में क्षमता के मुकाबले कुल 86 फीसदी पानी की उपलब्धता हुई हैं। इस साल मानसून के आने के बाद पहले एक माह तक मेवाड़ के प्रमुख बांधों,तालाबों में पानी की उपलब्धता का यह आकंड़ा 49 फीसदी तक ही पहुंचा था। वर्तमान में 6 बड़े बांधों में 94 फीसदी पानी की उपलब्धता है जबकि मध्यम श्रेणी के 22 बांधों में 61 और 191 छोटे बांधों में 78 प्रतिशत पानी की उपलब्धता है। इससे गर्मी के सीजन में पेयजल संकट की स्थिति बनने की संभावना कम हो गई हैं और किसानों को जरूरत अनुसार सिंचाई के लिए भी पानी मिल सकेगा।
आशानुरूप पानी की आवक भी हुई और कई बांध, तालाब छलके भी
जलसंसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार मेवाड़ से मानसून विदा होने तक यानी 3 अक्टूबर 2022 तक विभाग के उदयपुर जोन के अन्तर्गत उदयपुर संभाग के जिलों और भीलवाड़ा जिले में स्थित कुल 219 प्रमुख बांधों-झीलों में से 95 लबालब थे जबकि 35 पर चादर चल रही थी। उदयपुर जिले में 50 प्रमुख बांध-झीलों में से 30 लबालब थे जबकि 13 पर चादर चल रही थी। इस हिसाब से यह कहा जा सकता है कि इस मानसून में मेवाड़ के प्रमुख बांधों-झीलों में से आधे से अधिक में आशानुरूप पानी की आवक भी हुई और लबालब होकर कई बांध, तालाब छलके भी।

मानसून आने से पहले झीलों में 32 फीसदी पानी की उपलब्धता ही थी
मानसून के आने से पहले इस साल 219 प्रमुख बांधों-झीलों में क्षमता के मुकाबले कुल 32 फीसदी पानी की उपलब्धता ही थी। उस समय उदयपुर शहर की पीछोला और फतहसागर झील भी क्षमता के मुकाबले आधी खाली थी। इन झीलों को भरने वाले आकोदड़ा बांध,मादड़ी बांध और देवास प्रथम बांध के साथ ही उदयपुर की कई कॉलोनियों और झाड़ोल क्षेत्र के गांवों की प्यास बुझाने वाला मानसी वाकल बांध भी काफी खाली पड़ा था। इस कारण पानी की आवक को लेकर चिंता बढ़ी हुई थी।
काफी इंतजार के बाद छलका जयसमंद
इस मानसून में सबसे ज्यादा इंतजार जयसमंद झील ने करवाया। 8.38 मीटर पूर्ण भराव स्तर वाले जयसमंद में शुरूआती दौर में तो पानी की तेजी से आवक हुई, लेकिन जब इसके छलकने का समय आया तो बारिश का क्रम टूट गया। इस कारण नदी-नालों से पानी की आवक धीमी पड़ गई और इसके जलस्तर में बढ़ोतरी का क्रम भी धीमा पड़ गया। जलस्तर में कई दिनों तक 24 घंटे में 2 से 3 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी ही होने से लोगों में इंतजार बढ़ता रहा। हालांकि मानसून विदा होने का समय आने तक भी धीरे धीरे पानी की आवक बनी रही और इसके चलते आखिरकार जयसमंद पर भी चादर चल गई।

पूरे सीजन में मेवाड़ में जयसमंद में सबसे अधिक 1766 मिलीमीटर बारिश
इस साल 30 जून को कोटा-भरतपुर संभाग के रास्ते मानसून का राजस्थान में प्रवेश हुआ था और 1 जुलाई को मेवाड़ में पहुंचा। इस साल मानसूनी सीजन में हुई बारिश में उदयपुर संभाग में जयसमंद सबसे आगे रहा। यहां कुल 1766 मिलीमीटर बारिश हुई। प्रतापगढ़ में जिला मुख्यालय पर 1474, अरनोद 1317, गंभीरी(चित्तौड़) 1469 व भीलवाड़ा जिले के जैतपुरा में 1476 मिमी बारिश हुई।


