अनंता हॉस्पिटल में भर्ती हुई प्रसूता : प्रसव के बाद तीन सप्ताह तक डॉक्टर्स की क्रिटिकल केयर में रहा नवजात
राजसमंद,(एआर लाइव न्यूज)। गर्भवति महिला का सात माह में ही प्रसव होने से जच्चा और बच्चा दोनों के लिए खतरा होता है, लेकिन चिरंजीवी योजना के तहत अनंता हॉस्पिटल में भर्ती हुई गर्भवति महिला का 7 माह में सुरक्षित प्रसव हुआ है। डॉक्टर्स ने बताया कि महिला और उसका नवजात दोनों सुरक्षित हैं और चिकित्सकीय देखरेख में हैं।
जानकारी के अनुसार देलवाड़ा ब्लॉक के नेड़च गांव निवासी लक्ष्मण भील की गर्भवती पत्नी मनोहरी की चिकित्सकीय जांच में पता चला कि उनका प्रसव समय से पूर्व 7 माह में होगा, इससे जच्चा और बच्चा दोनों के जीवन को खतरा है। महिला को बड़े हॉस्पिटल में भर्ती करवाना होगा। लक्ष्मण भील मजदूरी करता है, ऐसे में आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से वह प्राइवेट हॉस्पिटल का खर्चा वहन नहीं कर सकता था, लेकिन फिर भी वह खर्चे के बारे में पता करने देलवाड़ा स्थिति अनंता हॉस्पिटल पहुंचा।
हॉस्पिटल स्टाफ ने योजना के बारे में बताया तो ली राहत की सांस
अनंता हॉस्पिटल में चिरंजीवी हेल्प डेस्क पर हॉस्पिटल स्टाफ ने उसे बताया कि वह खर्चे की चिंता नहीं करें और उनकी गर्भवति पत्नी को हॉस्पिटल लेकर आ जाएं। उनकी डिलीवरी और आगे के उपचार का पूरा खर्चा मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में कैशलेस हो जायेगा। लक्ष्मण भील ने बताया कि चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना और अनंता हॉस्पिटल के डॉक्टर्स की बदौलत उसकी पत्नी मनोहरी का सुरक्षित सिजेरीयन प्रसव हो सका, बच्चा चिकित्सकीय देखरेख में है।
अनंता हॉस्पीटल में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ प्रसुन भट्टाचार्य, डॉ कपिल श्रीमाली, डॉ पंजक एवं डॉ गौरव की टीम ने मनोहरी की डिलीवरी करवाई थी। डॉक्टर्स की टीम ने बताया की समय पूर्व प्रसव होने से बच्चा रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम से ग्रस्त था। जिसके कारण शिशु के फेफड़े पर्याप्त ऑक्सीजन अवशोषित नही कर पा रहे थी, इसलिये उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, अब वेंटिलेटर से भी शिशु को हटा दिया गया है, शिशु को मां दूध दिया जा रहा है, शिशु के वजन में भी पर्याप्त सूधार देखा जा रहा है। शिशु नियोनेटल आईसीयू से बाहर आ गया है तथा वह अब खतरे से पूरी तरह बाहर है।


