नदियों से आ रहा है पानी, तीन फीट ही है खाली
उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। जयसमंद का जलस्तर 27.5 फीट के मुकाबले बुधवार को 24.5 फीट पर पहुंच गया है। इसमेें आवक बनी हुई है और एक मोटे अनुमान के मुताबिक अब यदि तेज बारिश नहीं भी हो तो मौजूदा आवक को देखते हुए अगले 12 से 15 दिन में जयसमंद भी छलक सकता है।
जयसमंद के जलस्तर में 24 घंटे में 9 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है और अभी यह 91 सेंटीमीटर खाली है। वर्तमान में इसके जलस्तर में जिस हिसाब से बढ़ोतरी हो रही है उसको देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी 12 से 15 दिन में यह छलक सकता है। हालांकि इसी बीच कैचमेंट में एक दो बार तेज बारिश होने की स्थिति में इससे पहले भी यह छलक सकता है। जयसमंद को भरने वाली प्रमुख नदियों में अभी पानी का बहाव बना हुआ है।

बड़ी तालाब की चादर हुई तेज
उबेश्वर जी की पहाडिय़ों व मोरवानिया नदी से आवक बनी रहने से बड़ी तालाब की चादर तेज हो गई है। इसका सीधा फायदा फतहसागर को होने वाला है। इधर फतहसागर का गेज 13 फीट के ऊपर होने से इसके चारों गेट अभी भी दो दो इंच खुले रखे गए है। स्वरूपसागर में सीसारमा से आवक बनी हुई है। उदयसागर के दोनों गेट भी खुले हुए है। इससे वल्लभनगर और बडग़ांव बांध के जलस्तर में बढ़ोतरी का क्रम बना हुआ है।
देवाली में फिर टूटी मदार नहर : अनदेखी के चलते हो सकता बड़ा नुकसान

फतहसागर को भरने वाली मदार नहर की मजबूती की अनदेखी की हकीकत फिर सामने आ गई है। देवाली क्षेत्र में मदार नहर का बड़ा हिस्सा फिर क्षतिग्रस्त हो गया है। कुछ दिन पहले ही इसी देवाली क्षेत्र मेंं मदार नहर का किनारा क्षतिग्रस्त हो गया था। मजबूरन जलसंसाधन विभाग को चिकलवास पिकअप वियर से मदार नहर में पानी की आवक बंद करनी पड़ी। संयोग की बात यह रही कि बारिश का क्रम टूटने से मदार नहर में बडग़ांव क्षेत्र की पहाडिय़ों का पानी नहीं आया, वरना नहर और ज्यादा क्षतिग्रस्त होने की पूरी संभावना थी। ऐसे में नहर की मजबूती के स्थायी उपाय करने के साथ ही नहर के ऊपर से गुजरने वाले भारी वाहनों को सख्ती से बंद की जरूरत है।

इस मानसून में अब तक जयसमंद में सबसे ज्यादा बारिश
इस मानसून में उदयपुर संभाग में अब तक जयसमंद में सबसे ज्यादा कुल 1538 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। प्रतापगढ़ में 1437, अरनोद 1219, गंभारी चित्तौड़ में 1405 और तेजपुरा भीलवाड़ा में कुल 1302 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। मानसून विदा होने का समय अभी बाकी है और कैचमेंट में भी उम्मीद अनुरूप बारिश हो जाने से मेवाड़ में अधिकांश बांध,तालाब भर चुके है। इससे पेयजल व्यवस्था मजबूत होनेे के साथ ही साल भर किसानों को सिंचाई के लिए भी जरूरत अनुसार पानी मिल सकेगा।




