उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। शुक्रवार सुबह फतहसागर-स्वरूपसागर लिंक नहर के गेट बंद करने पहुंची जलसंसाधन विभाग की टीम को गेट बंद करने खूब हथौड़े पकटने पड़े। इससे मानसून पूर्व गेटों के रखरखाव संबंधित काम भी सवाल खड़े हो रहे है। यह स्थिति तब है जब जल प्रबंधन के लिए यूआईटी से हर साल जलसंसाधन विभाग को लाखों रूपए दिए जा रहे है।
सीसारमा नदी से आवक तेज होने और पीछोला का गेज 9 फीट 6 इंच हो जाने पर लिंक नहर होते हुए फतहसागर से पीछोला में जा रहे पानी को बंद करने जलसंसाधन विभाग की टीम शुक्रवार सुबह फतहसागर-स्वरूपसागर लिंक नहर के गेट बंद करने पहुंची।
जलसंसाधन विभाग के इंजीनियर की मौजूदगी में शुरूआत में यहां चाबी से गेट बंद करने की कवायद की गई, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी गेट नीचे नहीं उतरा। गेट बीच में ही अटकने पर पत्थर तौडऩे के काम आने वाला लौहे का बड़ा हथौड़ा (लौहे का गण)पटकना पड़ा। इसमेंं भी काफी मशक्कत हुई, कई बार चाबी से गेट ऊपर-नीचे करने की कवायद के साथ गेट पर हथौड़े पटकने का सिलसिला जारी रहा। मौके पर मौजूद कई लोग ऐसी तस्वीर देख हैरान नजर आए।
ऐसे हथौड़े पटक-पटक का बंद किए गेट, देखें वीडियो
लिंक नहर के गेट खोले तब ही हकीकत सामने आ चुकी थी
फतहसागर से पीछोला को भरने के लिए 9 अगस्त को जब फतहसागर-स्वरूपसागर लिंक नहर के गेट खोले गए थे, तब भी विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में यहां एक कर्मचारी को चार-पांच बार पैनल बॉक्स के पास लोहे की बड़ी चाबी के ऊपर चढक़र जोर लगाना पड़ा तब जाकर गेट खुल पाया।

यूआईटी से सालाना लाखों रूपए रखरखाव के नाम पर मिल रहे
यह स्थिति तब है जब जलसंसाधन विभाग को फतहसागर और पीछोला के जल प्रबंधन के लिए यूआईटी से हर साल 810 लाख रूपए देती है। इसमें फतहसागर ओवरफ्लो गेट, स्वरूपसागर केे मैन गेट, जलबुर्झ क्षेत्र में लगा पीछोला-गोवर्धन सागर लिंक नहर गेट,स्वरूपसागर लिंक नहर और मदार नहर के गेटों का रखरखाव भी शामिल है। सिर्फ ठेकेदार और विभागीय श्रमिकों के भरोसे गेटों का रखरखाव करवाने से तकनीकी रूप से गेटों का जो रखरखाव होना चाहिए वह नहीं हो पा रहा है।



