लकी जैन,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर में पिछले कुछ समय से विभागीय राजनीति के चलते निष्क्रिय सी हो गयी लेडी पेट्रोल टीम का रौब और खौफ अब शहर में दोबारा नजर आने वाला है। इससे मनचलों की शामत आएगी और शहर के किसी भी क्षेत्र में युवतियां और महिलाएं बेखौफ घूम सकेंगी। इसके लिए एडि.एसपी चन्द्रशील ठाकुर ने तैयारी शुरू कर दी हैं। लेडी पेट्रोल की नई टीम के लिए तेज-तर्रार 15 महिला कांस्टेबल का चयन भी कर लिया गया है।
एडिएसपी चन्द्रशील ठाकुर ने बताया कि 15 महिला कांस्टेबल का लेडी पेट्रोल टीम के लिए चयन कर लिया गया है। इनकी प्रोपर ट्रेनिंग करवाई जाएगी। जल्द ही यह टीम पहले ही तरह शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में पेट्रोलिंग करती दिखाई देगी, ताकि किसी भी क्षेत्र में किसी महिला को पुलिस की जरूरत हो या वह किसी मनचले से परेशान हो तो तत्काल लेडी पेट्रोल टीम मौके पर पहुंचकर पीड़ित महिला की मदद कर सकेगी।
कभी मनचलों को सिखाया सबक, तो कभी बन जाती थी जीवन रक्षक

तत्कालीन एसपी राजेन्द्र प्रसाद गोयल और एडि.एसपी चन्द्रशील ठाकुर ने ही अक्टूबर 2016 में देश की पहली लेडी पेट्रोल टीम की उदयपुर में शुरूआत करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। यह टीम एडि.एसपी ठाकुर की ही सोच थी, जिसे बाद में राज्य के हर जिले में अपनाया गया था। 6 अक्टूबर 2016 को तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उदयपुर में लेडी पेट्रोल टीम को हरी झंडी दिखाकर इसकी औपचारिक शुरूआत की थी। इस टीम की कमांडो जैसी ट्रेनिंग तत्कालीन आरआई वर्तमान डीएसपी अब्दुल रहमान ने करवाई थी।
दो से तीन सालों तक इस टीम ने उदयपुर में कई कार्रवाईयां कर खूब सराहना बटोरी थीं। कई मनचलों और चेन स्नेचर्स को धरदबोच उन्हें सबक सिखाया था। एक्सीडेंट केस में तत्काल मौके पर पहुंचकर घायल व्यक्ति को मौके पर प्राथमिक उपचार देकर उसका जीवन बचाया था। लेडी पेट्रोल टीम उदयपुर में स्कूल की छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बन गयी थी।

छात्राएं स्कूल-कॉलेज के बाहर खड़े होने वाले मनचलों से परेशान होती तो तत्काल लेडी पेट्रोल टीम को फोन कर देती थीं। लेडी पेट्रोल टीम सीधी एसपी या एडिएसपी को रिपोर्ट करती थी, तो कुछ समय में ही यह स्थिति हो गयी थी कि रात के 8 बज गए हों और लेडी पेट्रोल टीम गुजर रही हो तो शराब के ठेके टीम की बाइक देखकर शटर नीचे कर देते थे।
हालां कि पिछले दो-तीन सालों से विभागीय राजनीति के चलते इस टीम को निष्क्रिय जैसा कर दिया गया था। विभागीय बजट नहीं होने से इस टीम को इनकी खास नीले रंग की वर्दी, सर्दियों के लिए गर्म जैकेट तक नहीं मिल पा रही थी। विभाग न ही ट्रेनिंग दे रहा था और न ही टीम में नई कांस्टेबल का चयन हो रहा था।




