पीछोला के कैचमेंट में खाली हो रहा होटल, रिसोर्ट और शहरी आबादी का वेस्टेज
निगम के कुछ ऑटो टिपर चालक भी इसी कैचमेंट में डाल रहे वेस्टेज
देवेंद्र शर्मा, उदयपुर । प्रशासन बैखर है और जिम्मेदार मौन है। इनकी मौन स्वीकृति का ही परिणाम कहा जा सकता है कि पीछोला झील के कैचमेंट जगह जगह होटल, रिसोर्ट और शहरी आबादी का वेस्टेज खाली हो रहा है। बारिश के समय किसी न किसी रूप में यही वेस्टेज पानी के साथ बहते हुए शहर की उन झीलों में पहुंचता है जो लाखों की आबादी की प्यास बुझाने में अहम भूमिका निभा रही है।
समय के साथ साथ पीछोला के मजबूत कैचमेंट सीसारमा, बुझड़ा, कोडियात क्षेत्र में होटल-रिसोर्ट की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन इन होटल रिसोर्ट से निकलने वाले वेस्टेज के प्रभावी निस्तारण की तरफ न तो अफसर ध्यान दे रहे न संबंधित विभाग। उसके चलते इनका वेस्टेज ऑटो टीपर, ट्रैक्टर और लोडिंग टैंपों मेें भरकर झील के इसी कैचमेंट में खाली किया जा रहा है। हद तो तब हो जाती है जब नगर निगम के कुछ ऑटो टीपर चालक भी यहां शहरी आबादी का वेस्टेज खाली कर रहे है।

जागरूक युवा पहुंचे कलेक्ट्री, अफसरों को बताए हालात
कैचमेंट की बर्बादी देख भीलू राणा दल मेवाड़ से जुड़े युवा कलेक्ट्री पहुंचे और कलेक्टर के नाम ज्ञापन देकर प्रशासनिक तंत्र को बताया कि कोडिय़ात-नया गुड़ा रोड पर लंबे समय से लोडिंग वाहनों, ऑटो टिपर से लाकर पॉलीथिन में भरा हुआ वेस्टेज खाली किया जा रहा है। स्थानीय लोग कई बार विरोध जता चुके है लेकिन प्रशासनिक सख्ती के अभाव में ऐसे लोगों की मनमर्जी रूक नहीं पा रही है। बदबू से आमजन परेशान है और झीलों का कैचमेंट भी बर्बाद हो रहा।

प्रशासनिक तंत्र को बताया कि वेस्टेज के ढ़ेर पर दिन भर गायों का जमावड़ा लगा रहता है और पॉलिथीन के साथ सड़ी गली सामग्री खाने से पशु धन भी अकाल मौत की राह पर जा रहा है। ऐेसे वाहनों को जब्त कर वाहन चालकों के खिलाफ पुलिस कारवाई की जाए। कलेक्ट्री पहुंचे युवाओं में भीलू राणा दल मेवाड़ के अध्यक्ष सुरेश कुमार सोलंकी, संस्थापक फतहलाल पारगी, राजेश मीणा, श्यामलाल, प्रकाश, प्यारचंद, लक्ष्मण दीपक शामिल थे।

बड़ी क्षेत्र में फतहसागर के कैचमेंट भी खाली होता है वेस्टेज
बड़ी क्षेत्र में सुनसान इलाके में खाली पड़ी जगह जगह पर आए दिन ऑटो टिपर,ट्रैक्टर ट्रॉली और लोडिंग टैंपों से वेस्टेज खाली होना आम बात हो चुकी है। बारिश के समय यहीं वेस्टेज सबसे पहले पानी के साथ बहकर झील में पहुंचने की शिकायत भी रहती है। उसके बावजूद प्रशासन अनदेखी कर रहा है।




