जयपुर में ऑल इंडिया लीगल सर्विसेज मीट में केन्द्रीय मंत्री रिजिजू और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वकीलों की महंगी फीस पर एकराय होकर अपनी बात रखी
जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नालसा की ओर से जयपुर स्थित जेईसीसी में शनिवार से दो दिवसीय ऑल इंडिया लीगल सर्विसेज मीट का शुभारंभ हुआ। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एनवी रमना, केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरन रिजिजू, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष यूयू ललित की मौजूदगी में सम्मेलन की शुरूआत हुई।
सम्मेलन में केन्द्रीय मंत्री रिजिजू और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की फीस का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में वकील एक-एक पेशी का 10 से 15 लाख रूपए लेते हैं, आम आदमी सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को अफोर्ड ही नहीं पाता है, इससे देश का बड़ा तबका न्याय से वंचित हो रहा है। इस बारे में कुछ काम करने की जरूरत है, जिससे हर तबके के व्यक्ति को न्याय मिल सके।
इस सम्मेलन में देश के 15 सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश, 22 हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और देशभर के 76 हाईकोर्ट न्यायाधीश भाग ले रहे है। आजादी के 100 वें साल में देश में विधिक सेवाओं की आवश्यकता और आमजन तक विधिक सेवाएं पहुंचाने की चुनौतियों के बारे में इस सम्मेलन में दो दिनों तक मंथन होगा।

चीफ जस्टिस ने नई भर्तियों पर जोर दिया
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में नालसा की ओर से तैयार विभिन्न ई पोर्टल और एप का भी लोकर्पण किया गया। साथ ही केंद्रीय विधि मंत्रालय तथा राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के बीच 112 एस्पिरेशनल जिलों में लीगल लिटरेसी प्रोग्राम, टेली लॉ तथा न्यायबंधु के लिए एमओयू किया गया।
सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधिपति श्री एन वी रमन्ना ने अपने उद्बोधन में उन्होंने ज्यूडिशियल सिस्टम में आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाने तथा नई भर्तियां करने पर भी जोर दिया, जिससे कोर्ट में लंबित मामलों को कम किया जा सके।

न्यायालयों में लंबित प्रकरण बड़ी चुनौती होंगे
सम्मेलन में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि देश की अदालतों में लंबित प्रकरण आज भी सरकार के लिए चुनौती बने हुए है। लंबित प्रकरणों का अंबार यू ही लगता रहा तो आने वाले समय में यह बड़ी चुनौती होगी । उन्होंने कहा कि देश की जेलों के हालातों को देखना चाहिए। जेलों में क्षमता से ज्यादा बंदी है, जेलों के हालात सुधारने के लिए केंद्र सरकार काम कर रही है। इस दिशों में सुप्रीम कोर्ट के साथ ही हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को भी सोचना चाहिए । आजादी के अमृत महोत्सव के तहत देश की जेलों में बंद विभिन्न श्रेणियों के बंदियों की रिहाई करने के लिए मसौदा तैयार किया गया है।




