उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। राजस्थान में प्री- मानसून की बारिश 14 जून के बाद से शुरू हो सकती है। जबकि मानसून के मेवाड़ और हाडौती के रास्ते 20 जून को राजस्थान में दस्तक देने की संभावना है। मौसम विभाग ने रविवार को पूर्वानुमान जारी किया है। उसके अनुसार 14-15 जून के बाद राज्य के कुछ भागों में प्री- मानसून गतिविधियां शुरू होने की संभावना है।
आगामी एक सप्ताह के दौरान राज्य के अधिकतर भागों में शुष्क पश्चिमी हवाओं का प्रभाव बना रहेगा। वर्तमान में राज्य के पश्चिमी व उत्तरी भागों में कहीं-कहीं हीटवेव, तीव्र हीटवेव की परिस्थिति बनी हुई है। आगामी 48 घंटों के दौरान तापमान में विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है। यानी हीटवेव का दौर अभी भी अगले 48 घंटों तक जारी रहने की प्रबल संभावना है। आगामी 3 दिनों तक पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर व बीकानेर संभाग के जिलों में अपेक्षाकृत तेज धूल भरी हवाएं चलने की संभावना है।

फतहसागर को भरने वाली मदार नहर कचरे से अटी पड़ी है
मानसून के दस्तक देने से पहले प्रदेश में प्री- मानसून की बारिश की गतिविधियां शुरू होने में अभी ज्यादा समय नहीं बचा है। इसके बावजूद अभी तक फतहसागर को भरने वाली मदार नहर की सफाई भी शुरू नहीं हो पायी है। यह काम देवाली से लेकर मनोहरपुरा पुलिया तक नगर निगम को और मनोहरपुरा पुलिया से चिकलवास पिकअपवियर तक जलसंसाधन विभाग को करना है।
दोनों ही विभाग कोई तैयारी तक नहीं कर पाए है। देवाली से परशुराम कॉलोनी पुलिया तक मदार नहर की दीवार में जगह-जगह बड़े बड़े खड्ड़े हो गए है। नहर में बहाव शुरू होने पर इन्ही में से बहुत ज्यादा सीपेज होने से निचली बस्तियों में पानी आने की समस्या बनी रहती है। अभी सीमेंंट कंकरीट से इनकी मरम्मत का सही समय है। इसके बावजूद इस तरफ भी ध्यान नहीं दिया जा रहा।
गुमानिया नाले की सफाई के नाम पैसा लेकर बैठ गया जलसंसाधन विभाग

स्वरूप सागर पुलिया से आयड़ नदी के संगम तक गुमानिया नाले की सफार्ई के लिए यूआईटी से पैसा मिलने के बावजूद जलसंसाधन विभाग इस काम को लेकर उदासीन बना हुआ है। पिछले दिनों कांग्रेस के नव संकल्प चिंतन शिविर में सीएम सहित कांग्र्रेस के कई नेताओं की उदयपुर में आवाजाही लगी रही। उस समय यूआईटी सचिव बालमुकुंद असावा ने सख्ती की तो जलसंसाधन विभाग ने यूआईटी पुलिया के पास जेसीबी उताकर गुमानिया नाले का कुछ हिस्सा साफ किया। उसके बाद से सफाई कार्य बंद पड़ा है और जो सफाई की उसके भी कई ढ़ेर गुमानिया नालें में ही पड़े है। प्री मानसून की बारिश आते ही नाले का पेटा गीला होने से सफाई कार्य संभव नहीं हो पाएगा।



