उदयपुर(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर मेंं चल रहे कांग्रेस के तीन दिवसीय नव संकल्प चिंतन शिविर का रविवार को ‘भारत जोड़ों’ के नए संदेश के साथ समापन हुआ।
राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी सहित करीब 430 कांग्रेस नेताओं की मौजूूदगी में हुए समापन सत्र में राहुल गांधी भाजपा, आरएसएस को लेकर आक्रामक नजर आए। इस बीच उन्होंने बातों ही बातों उन नेताओं को भी जमीनी हकीकत बता दी जिनके पास न तो वोट बैंक है न जिनका पहले की तरह जनता से सीधा जुड़ाव।
राहुल ने कहा कि हमारा जनता के साथ जो संबंध पहले होता था वह संबंध फिर से बनाना होगा। हमें जनता के बीच जाकर बैठना चाहिए और उनकी समस्याओंं को समझना चाहिए। हमारा जनता के साथ जो संपर्क टुट गया है उस संपर्क को फिर से मजबूत बनाने की जरूरत है। कांग्रेस पार्टी ने निर्णय लिया है कि अक्टूबर महीने में पूरी कांग्रेस पार्टी जनता के बीच जाएगी और यात्रा करेगी। जनता के साथ जो रिश्ता कांग्रेस का था उसे फिर से पूरा करेगी। ये शॉर्टकट से नहीं होने वाला है और ये काम पसीना बहाकर ही किया जा सकता है।

राहुल ने कहा कि मैने मेरी जिंदगी में भ्रष्टाचार नहीं किया, एक रूपया भी नहीं लिया। इसलिए सच्चाई बोलने से मैं डरता नहीं हु। मैं हर कार्यकर्ता और नेता को कहता हुं कि इनसे घबराने की जरूरत नहीं है। मैं हमेेशा आपके साथ खड़ा हूं इस लड़ाई को लडऩे। राहुल के संबोधन से पहले नव संकल्प चिंतन शिविर में समन्वय पैनल के संयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी जी को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, इस दौरान कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक भी हुई।

राहुल की चिंता वाजिब मेवाड़ से लेकर देश भर में यही हाल
राहुल गांधी ने आज जो बात बोली वह कहीं न कहीं कड़वी हकीकत भी है और कांग्रेस नेताओंं के लिए बड़ा संदेश भी है जो सिर्फ पद लेकर बैठे हुए है। उनके पास न तो जनता के लिए समय है न कार्यकर्ताओंं के लिए। सिर्फ पद लेकर बैठे हुए कांग्रेस नेताओं को जनता और कार्यकर्ता या तो किसी बड़ी सभा के दौरान याद आते है या फिर चुनावी मौसम में। क्योंकि जनता और कार्यकतार्आें के बिना न तो कोई सभा सफल हो पाती न चुनावी माहौल बनाया जा सकता।
देश की सबसे पूरानी राजनीतिक पार्टी होने के बावजूद आज कांग्रेस दो राज्यों में सिमट कर रह गई है। उसके पिछे सबसे बड़ा यही है कि कांग्रेस नेताओं का अब जनता से सीधा जुड़ाव कमजोर पड़ चुका है। बात चाहे उस मेवाड़ की करें जहां संगठन को मजबूत करने कांग्रेस ने तीन दिन तक चिंतन मनन किया उस मेवाड़ में भी कांग्रेस के अधिकांश नेताओं का जनता से वो जुड़ाव नजर नहीं आता जो किसी जमाने में मोहनलाल सुखाडिय़ा, हरिदेव जोशी, हीरालाल देवपूरा, शिवचरण माथूर के समय नजर आता था। कांग्रेस नेताओं की जनता और कार्यकर्ताओं से न तो वो आत्मियता रही न मजबुत जुड़ाव। ऐसे में राहुल गांधी की चिंता वाजिब है।
ये एक विचारधारा की लड़ाई है, क्षेत्रीय पार्टी इस लड़ाई को नहीं लड़ सकती
राहुल ने कहा कि इस वक्त हमारी लड़ाई विचारधारा की है। कभी-कभी हमारे सीनियर नेता डिप्रेशन में चले जाते हैं, क्योंकि लड़ाई आसान नहीं है। कांग्रेस बीजेपी और आरएसएस की विचारधारा की लड़ाई लड़ रही है। ये लड़ाई मेरी जिंदगी की लड़ाई है, क्षेत्रीय पार्टी इस लड़ाई को नहीं लड़ सकती है, लेकिन हमें क्षेत्रियों दलों का सम्मान करना होगा। बीजेपी कांग्रेस की बात करती है, लेकिन क्षेत्रीय पार्टी की बात नहीं करेगी, क्योंकि वो जानते हैं कि क्षेत्रीय पार्टी की जगह है, लेकिन वो बीजेपी को नहीं हरा सकते हैं।
भाजपा में किसी की बात नहीं सुनी जाती है
राहुल गांधी ने महंगाई, जीएसटी, बेरोजगारी सहित कई मुद्दों पर केंद्र सरकार और भाजपा पर सवाल उठाते हुए यह भी कहा कि भाजपा में किसी की बात नहीं सुनी जाती है। यहां सिर्फ दो लोग ही देश को चलाना चाह रहे है। पार्टी के भीतर तानाशाही चरम पर है। कांग्रेस पार्टी संवाद की बात करती है और हमारी पार्टी में बिना भेदभाव किए हुए बोलने का सभी को मौका दिया जाता है। हमनें यहां तीन दिन ग्रुप डिस्कशन किया।




