- नारायण सेवा संस्थान व पैरालिम्पक कमेटी ऑफ इण्डिया के साझे में हो रही चैंपियनशिप में तैराकों ने विभिन्न श्रेणियों में जीते मैडल
- पैर से असमर्थ तो हाथों से चलते हैं विमलेश, तैराकी में जीत चुके हैं 11 मैडल
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। नारायण सेवा संस्थान एवं पैरालिम्पक कमेटी ऑफ इण्डिया के संयुक्त तत्वावधान में खेलगांव में हो रही 21वीं राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के दूसरे दिन शनिवार को देश भर से जुटे दिव्यांग तैराकों ने पूरी शिद्दत से अपना दमखल दिखाया और अलग-अलग श्रेणियों में पदकों पर कब्जा किया।
नारायण सेवा संस्थान अध्यक्ष प्रशान्त अग्रवाल ने बताया कि शारीरिक रूप से किसी न किसी खामी के बावजूद महाराणा प्रताप खेल गांव के तरणताल में पैरा तैराकों के जज्बे, चुस्ती और फुर्ती को देखकर दर्शकों ने दांतों तले अंगुली दबा ली। खिलाड़ियों का उत्साह वर्धक करने वालों में ले.कमांडर शलभ शर्मा और प्रसिद्ध तैराक व प्रशिक्षक हेमेन्द्र सिंह राणावत भी थे।
चैंपियनशिप के दूसरे दिन स्त्री-पुरुषों की विभिन्न श्रेणियों के 111 इवेंट हुए। विभिन्न स्पर्धाओं में सेना की टीम सहित 23 राज्यों से हिस्सा लेने वाले 469 दिव्यांग में 366 पुरूष और 103 महिलाएं थी। आज कुल 224 मेडल दिए गए। तैराकी में दम दिखाने वाले 107 स्विमर्स गोल्ड, 71 रजत और 46 ताम्र मेडल पाने में सफल हुए। दृष्टिबाधित तैराकों को अपनी लेन में मछली सी फुर्ती से लक्ष्य की ओर बढ़ते देख दर्शक दीर्घा तालियों से गूंज उठी। राष्ट्रीय पैरा तैराकी चैम्पियनशिप का समापन रविवार को सुबह 11.30 बजे चैम्पियन ट्राफी अन्य पुरस्कारों के साथ होगा।
विभिन्न स्पर्धाओं में राजस्थान के लखन सिंह, साधना मलिक, अनुश्री मोदी, सरोज, पूजा और जिया ने गोल्ड, किरण टांक, अजय देवंदा और कंचन बाला ने सिल्वर और निर्मला देवी ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए।
पैरों से असमर्थ होते हुए भी जीते कई मेडल्स

21 वीं नेशनल पैरा स्विमिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने उदयपुर आए प्रयागराज उत्तरप्रदेश निवासी विमलेश निशाद (36 वर्ष) जन्म से ही दोनों पैरों से असमर्थ हैं और चलने के लिए हाथों का इस्तेमाल करते हैं। समाज के ताने तो कभी किसी और रूप में उनके चारों ओर सिर्फ निराशा की बादल छाए हुए थे। लेकिन विमलेश ने खुद को हताश नहीं होने दिया और संघर्ष करते रहे।
विमलेश के गांव से ही यमुना नदी निकलती है, विमलेश नदी में तैरकर हर रोज स्कूल जाते थे। इससे उनमें तैराकी प्रतिभा निखर रही थी, अब जरूरत थी तो सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की। इसी बीच विमलेश एक कोच के संपर्क में आए और उनसे अत्यधिक प्रभावित हुए। यहीं से विमलेश की जिंदगी में नया मोड आ गया।
विमलेश ने कोच के 6 वर्षों से कठिन प्रशिक्षण प्राप्त किया और 2009 में कोलकाता में हुई 50 मीटर पैरा-स्विमिंग में हिस्सा लिया। पहले ही प्रयास में विमलेश ने सिल्वर मेडल जीता और उनकी यही जीत उनका मोटीवेशन बनी। विमलेश अब पैरा स्विमिंग में ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड मेडल्स जीतने के लिए तैयारी कर रहे हैं। वे अब तक राज्य स्तरीय पैरा-स्विमिंग प्रतियोगिता में कुल 11 सिल्वर और कांस्य पदक जीत चुके है।



