सूने घर में किलकारियां गूंजी ही थीं कि फिर सन्नाटा छा गया
आदिवासी क्षेत्र में बच्चे को गोद देने की कानूनी प्रक्रिया की जागरूकता की जरूरत
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। उदयपुर की कोटड़ा पुलिस ने 6 महीने के बच्चे को बेचने वाले उसके पिता और सगे मामा सहित दलाल और खरीददार को गिरफ्तार कर लिया है। बच्चे को बेचने के इस संवेदनशील मामले में पुलिस ने जब पूछताछ की तो नया मोड़ सामने आया।
कोटड़ा गढ़ी, खेरोज निवासी आरोपी सेजू भाई पुत्र किरा भाई (बच्चे के पिता) ने पुलिस पूछताछ में बताया कि उसके 6 बच्चे हैं, सबसे छोटा बच्चा 6 माह का है। वह मजदूरी करता है और उसके लिए परिवार के सभी सदस्यों का पालन-पोषण मुश्किल हो रहा था। सेजू ने पत्नी तारी के भाई चंदु (साले) को कहा कि वह 6 माह के सबसे छोटे बेटे को किसी ऐसे दंपत्ति को देना चाहता है, जो निसंतान हो। ताकि इस बच्चे की अच्छी परवरिश हो सके।
सेजू के कहने पर चंदु पारगी (साले) ने परिचित सुरेश के जरिए नन्दा से और फिर अमृत भाई से संपर्क किया। अमृत भाई ने बताया कि उनके परिचित विजय दवे की कोई संतान नहीं है और वे बच्चे को गोद लेना चाहते हैं। अमृत भाई ने विजय दवे से 1 लाख 60 हजार रूपए लिए और बच्चा उन्हें बेच दे दिया गया।
मां बच्चे को तलाशती रही, नहीं मिला तो एफआईआर करवाई

पुलिस ने बताया कि चंदु बच्चे को उसकी बहन से ये कहकर लेकर गया था कि अभी थोड़ी देर में बच्चे को वापस लेकर आ रहा है। लेकिन चंदु बच्चे को वापस नहीं लाया। बार-बार कहने पर भी जब बच्चा नहीं मिला तो तारीबेन (सेजू की पत्नी और बच्चे की मां) ने थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी।पुलिस ने तारी के कहने पर उसके भाई चंदु से पूछताछ की तो माजरा सामने आ गया।
पुलिस ने 1 लाख 60 हजार रूपए देकर बच्चे को खरीदने वाले विजय दवे के घर दबिष देकर उसे दस्तयाब किया। इसके बाद बच्चे को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेष कर मां तारीबेन को सुपुर्द कर दिया है।
ये हुए गिरफ्तार
- सेजुभाई पिता किरा भाई निवासी विरा कोटडा गढी, खेरोज जिला साबरकाठा गुजरात।(बच्चे के पिता)
- चन्दु पिता लाडु निवासी सडा, कोटडा जिला उदयपुर।(बच्चे के मामा)
- नन्दु उर्फ नन्दा पिता नरसा निवासी मढवाल, फला उमरा, कोटडा जिला उदयपुर। (चन्दु के परिचित)
- सुरेश पिता नुरिया निवासी महाडी, कोटडा जिला उदयपुर। (परिचित)
- अमृत भाई पिता वादिरा भाई निवासी मालवास, खेरोज जिला साबरकाठा गुजरात।(पैसे लेकर बच्चे को बेचने वाले)
- विजय दवे पिता कान्तिलाल निवासी कल्याणपुरा, मार्ग नम्बर 4, बाडमेर हाल नान्दवी रामदेव मन्दिर के पास बनाडवाडा जिला जोधपुर।(बच्चे को लेने वाले निसंतान)
सरकारी तंत्र पर भी सवाल
- इस घटना ने सरकारी तंत्र पर भी सवाल खड़े किए हैं। सवाल यह है कि सरकार की ओर से काम करने वाली आशा सहयोगिनी या कई एनजीओ क्यों नसबंदी सहित अन्य उपायों को लेकर लोगों को जागरूक नहीं कर रहे हैं। ताकि आदिवासी लोग अपने परिवार को सीमित रखकर जीवन यापन कर सकें।
- कोट़ड़ा क्षेत्र में ऐसे मामले पहले भी आ चुके हैं, तो वहां सरकारी तंत्र और एनजीओ लोगों को बच्चा गोद देने और लेने की कानूनी प्रक्रिया के बारे में जागरूक क्यों नहीं करते हैं।
पुलिस ने बताया कि विजय दवे ने अगर कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर बच्चे को गोद लिया होता तो आज उनके घर में आया हुआ बच्चा न तो वापस जाता और न ही उन्हें जेल जाना पड़ता। कानून का उल्लंघन कर बच्चे को गलत तरीके से गोद लेने और बच्चे की खरीद-फरोख्त के कारण इस दंपत्ति को अब कई कानूनी कार्रवाईयों से गुजरना पड़ेगा।


