उदयपुर (एआर लाइव न्यूज)। संजय गार्डन के सामने हजारों टन भराव डालकर फतहसागर के डूब क्षेत्र की जमीन को पाटने का काम फिर शुरू हो गया है। जबकि यह जमीन नियंत्रित निर्माण निषेध क्षेत्र के जोन-1 में आ रही है। जहां झील को नुकसान पहुुंचाने जैसी किसी प्रकार की मानवीय गतिविधियां, निर्माण हो ही नहीं सकता।
मस्तानबाबा रोड पर किनारे इस जमीन का भविष्य में व्यवसायिक उपयोग करने के उद्देश्य से भू व्यवसायी जब जब मौका मिल रहा तब तब फतहसागर के डूब क्षेत्र की जमीन का लेवल ऊंचा करने का षडय़ंत्र कर रहा है। दूसरी तरफ यूआईटी की जानकारी में होने के बावजूद अफसर, क्षेत्रीय पटवारी, रेवेन्यू इंस्पेक्टर और प्रशासन चुप्पी साधे हुए है। यह स्थिति तब है जब उदयपुर की झीलों को लेकर हाईकोर्ट सख्त भी है और लगातार मॉनिटरिंग भी की जा रही है।

यूआईटी हर बार करती खाना पूर्ति, इसलिए भू व्यवसायी के होसले बुलंद
यहां झील पेटे का लेवल ऊंचा करने का खेल इसलिए चल रहा है क्योंकि यूआईटी के अफसर इस भूव्यवसायी के प्रति हर बार हमदर्दी दिखाते नजर आए। पिछले तीन साल में ही यहां जमीन का लेवल ऊंचा करने की शिकायत कई बार आ चुकी है। हर बार यूआईटी ने खानापूर्ति की उसी का नतीजा है कि आज फिर यहां फतहसागर की बर्बादी की कहानी लिखने का काम शुरू हो गया।

रामनिवास मेहता ने की थी सख्ती, उसके बाद हर बार हमदर्दी
फतहसागर के डूब क्षेत्र की जमीन का लेवल इसलिए ऊंचा किया जा रहा है ताकी झील लबालब हो तब भी पानी यहां तक पहुंचे ही नहीं। बाद में यह बताया जा सके कि यह जमीन तो झील के डूब क्षेत्र में है ही नहीं। फतहसागर के डूब क्षेत्र की जमीन का लेवल ऊंचा करने का यह खेल जनवरी 2014 से चल रहा है। पहली बार 2016 में यहां तत्कालीन कलेेक्टर आशुतोष पेडणेकर और यूआईटी के तत्कालीन सचिव रामनिवास मेहता ने सख्ती कर करीब 200 ट्रिप भराव यहां से बाहर निकलवाया था, मगर बाद में हाईकोर्ट से स्टे की आड़ में जैसै जैसे मौका मिल रहा भू व्यवसायी झील पेटे में भराव डालने और इस भराव को समतल करने में जुट जाता है।



