देवेन्द्र शर्मा,(एआर लाइव न्यूज)। नोटबंदी के बाद दावे किए गए थे कि देश में जाली नोटों के कारोबार पर लगाम भी लगेगी, लेकिन राजस्थान में नोटबंदी के बाद जाली नोटों के पकड़े गए प्रकरणों पर गौर किया जाए तो मामले बढ़े हैं। विधानसभा में गृह विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार नोटबंदी (8 नवंबर 2016) के बाद से 31 दिसंबर 2021 तक राजस्थान में नकली नोटों के कुल 309 मामले दर्ज हुये है।
राजस्थान विधानसभा में विधायक भरतसिंह कुंदनपुर के लिखित सवाल के जवाब में गृह विभाग ने यह जानकारी दी है। राज्य सरकार ने यह बात भी मानी है कि प्रदेश से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर नोटबंदी के बाद राजस्थान में जाली नोटों के प्रकरणोंं में आंशिक रूप से बढ़ोतरी हुई है।
विधायक भरत सिंह ने विधानसभा में लिखित सवाल के माध्यम से यह जानकारी मांगी थी कि नोटबंदी के बाद से अब तक प्रदेश मेंं जाली नोटों के कुल कितने प्रकरण विभिन्न थानों में दर्ज हुऐ हैं। क्या देश में नोटबंदी के बाद प्रदेश में जाली नोटों के प्रकरणों की संख्या में गिरावट आई है? यदि हां तो कितने प्रतिशत?। इसी बीच गुरुवार को विधानसभाग में रीट परीक्षा मेंं गड़बड़ी की सीबीआई से जांच की मांग को लेकर विपक्ष के हंगामे के चलते दोपहर तक तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
वर्ष : जाली नोटों के दर्ज प्रकरण की संख्या
- 2014 : 55
- 2015 : 45
- 2016 : 29 (नोटबंदी 8 नवंबर 2016 को हुई)
- 2017 : 49
- 2018 : 66
- 2019 : 92
- 2020 : 48
- 2021 : 54
नोटबंदी के बाद 2017 से 2021 तक इन जिलों में जाली नोट के सबसे ज्यादा मामले पकड़े गए
- जयपुर पूर्व : 78 प्रकरण
- गंगानगर : 13
- बीकानेर : 12
- सीकर : 11
- जोधपुर पश्चिम : 11
- उदयपुर : 10
- अजमेर : 10
प्रदेश में तीन वर्षों में पेपर लीक के 8 मामले, 85 लोग गिरफ्तार

विधायक बलजीत यादव के लिखित सवाल पर गृह विभाग ने जानकारी दी है कि प्रदेश में विगत तीन वर्षों में पेपर आउट, लीक के कुल 8 प्रकरण दर्ज हुए हैं। कुल 8 प्रकरणों में 85 व्यक्तियों की गिरफ्तारी हुई है। चार प्रकरणों में चालान पेश किया जा चुका है और एक प्रकरण में चालान न्यायालय में पेश किया जाना शेष है। तीन प्रकरणों में अनुसंधान जारी है। विधायक ने यह सवाल भी पूछा कि क्या सरकार ऐसे प्रकरणों को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का विचार रखती है?। इसके जवाब में गृह विभाग ने बताया कि राज्य मे होने वाली परीक्षाओ मे अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त कानू कानून बनाने का मामला प्रक्रियाधीन है।



