झील किनारे बनाई अवैध सीढिय़ा ध्वस्त, रेस्टोरेंट भी सीज
उदयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। यूआईटी ने शुक्रवार को फतहसागर की पाल के सामने संचालित राणाजी रेस्टोरेंंट को सीज कर दिया है। फतहसागर की पाल से सीधे रेस्टोरेंट में आने-जाने के लिए अवैध रूप से बनाई पक्की सिढिय़ों को भी बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। जोधपुर हाईकोर्ट में दायर याचिका खारिज होने पर यह कारवाई हुई है।
यूआईटी तहसीलदार भागीरथ सिंह शुक्रवार सुबह बुलडोजर और जाब्ता लेकर देवाली छौर पर फतहसागर की पाल पर पहुंचे। यहां सबसे पहले फतहसागर की पाल से राणाजी रेस्टोरेंट में आने-जाने के लिए रास्ता तैयार कर बनाई गई पक्की सिढिय़ों को ध्वस्त किया गया। उसके बाद हाथों-हाथ यहां यूआईटी ने लेबर लगाकर उस जगह पक्की दीवार चुनवा दी ताकि फिर से यहां से लोगों की आवाजाही शुरू नहीं की जा सके। इसके बाद यूआईटी टीम राणाजी रेस्टोरेंट को सीज करने नीचे उतरी।

सीज होने के दौरान आनन-फानन में रेस्टोरेंट संचालकों ने सामान बाहर निकाला

संचालकों ने रेस्टोरेंट के अंदर रखा कुछ सामान आनन-फानन में बाहर निकाला, उसके बाद रेस्टोरेंट परिसर को सीज कर दिया गया। इस मामले में पहला पंचनामा आज से करीब आठ साल पहले बनाया गया था।
यूआईटी के क्षेत्रीय पटवारी ने 5 अप्रैल 2013 को पंचनामा बनाकर दिया कि राजस्व ग्राम देवाली के आराजी नबंर 2686 रकबा 0.2100 हैक्टर भूमि पर लोहे के एगंल खडे कर गुजराती केलु डालकर रेस्टोरेन्ट का निर्माण किया जा रहा है, जो कि निर्माण निषेध क्षैत्र में आता है। इसके बाद यह मामला स्थानीय कोर्ट के साथ ही संभागीय आयुक्त की कोर्ट और हाईकोर्ट तक भी पहुंचा। अब हाईकोर्ट ने झील हित में फैसला सुनाया, तो यह बड़ी कारवाई संभव हो पायी हैं।
सचिव अरूण हसीजा के निर्देश पर झील हित में हुई बड़ी और अहम कारवाई के दौरान रेवेन्यू इंस्पेक्टर गणपत शर्मा, चिरन्तन शर्मा, पटवारी लक्ष्मण माली, एईएन चतरसिंह, जेईएन निर्मल सुथार और राजीव सोनी भी मौजूद रहें।
रास्ता ऐसा बना दिया था, मानों पाल पर हो रेस्टोरेंट

फतहसागर की पाल के ठीक सामने निर्माण निषेध क्षेत्र में यह रेस्टोरेंट बनाया गया। उससे भी बड़ी बात यह है, कि अपनी कमाई बढ़ाने रेस्टोरेंट में आने-जाने का रास्ता सीधे फतहसागर की पाल से ही जोड़ दिया। जो कि पूरी तरह से अवैध था। यह इसलिए किया गया ताकी फतहसागर आने वाले लोगों की इस रेस्टोरेंट तक पहुंच आसान हो सके। फतहसागर पाल पर निकलतीं पक्की सीढ़ियां तक बना दी गयीं।
झील प्रेमी कई बैठकों में यह सवाल उठा चुके थे, कि आखिर एक रेस्टोरेंट में आने जाने का सीधा रास्ता फतहसागर की पाल से कैसे जोड़ा जा सकता हैं? ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले के बाद यूआईटी की इस कार्यवाही को झील हित में बड़ी जीत मान सकते हैं।


