जयपुर,(एआर लाइव न्यूज)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 2013 में केदारनाथ में बादल फटने से आयी त्रासदी (केदारनाथ-उत्तराखण्ड त्रासदी) में जान गंवाने वाले तथा स्थाई रूप से लापता हुए व्यक्तियों के किसी एक आश्रित को अनुकम्पात्मक नियुक्ति देने के प्रावधान को पुन: लागू करने को मंजूरी दे दी है। गहलोत के इस फैसले से उदयपुर सहित मेवाड़ के भी कई प्रभावित परिवारों को बड़ा संबल मिल सकेगा।
उल्लेखनीय है कि जून 2013 में आई इस भीषण प्राकृतिक आपदा में राजस्थान के के भी निवासियों की मौत हो गई थी। कई लोग लापता हो गए थे, जिनका अभी तक पता नहीं चल सका है। इस त्रासदी के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उत्तराखण्ड जाकर हालात का जायजा लिया और वहां फंसे लोगों के लिए चलाए गए राहत एवं बचाव कार्यों की मॉनिटरिंग की थी। तब उत्तराखण्ड से लौटने के बाद गहलोत ने पीडि़त परिवारों को संबल देने के लिए 29 जुलाई 2013 को राहत पैकेज जारी किया था। इस पैकेज में अनुग्रह सहायता राशि के अतिरिक्त एक आश्रित को अनुकम्पात्मक नियुक्ति देने का प्रावधान कर नियुक्तियां देना प्रारम्भ कर दिया था।

दिसंबर 13 में बनी भाजपा सरकार ने खत्म कर दिया था प्रावधान
दिसंबर 2013 में राजस्थान में भाजपा की सरकार बनने के बाद आश्रितों को अनुकम्पात्मक नियुक्ति देने के प्रावधान को खत्म कर दिया गया। साथ ही, अनुकम्पात्मक नियुक्ति प्राप्त कर चुके अभ्यर्थियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई थीं। गहलोत ने इन परिवारों को राहत प्रदान करने के लिए उत्तराखण्ड त्रासदी राहत पैकेज में अनुकम्पात्मक नियुक्ति के प्रावधान को पुन: बहाल करते हुए पीडि़तों के आश्रितों को फिर से अनुकम्पात्मक नियुक्ति देने का फैसला किया है।


