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यूके और ब्राजील के बाद उदयपुर में दिखा दुर्लभ ल्यूसिस्टिक किंगफिशर: भारत में पहली और विश्व में तीसरी साईटिंग

arln-admin by arln-admin
October 5, 2021
Reading Time: 1 min read
leucistic kingfisher bird sightings in udaipur first time in india


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पक्षी प्रेमी भानुप्रताप और विधान की उपलब्धि

उदयपुर,(ARLive news)। उदयपुर जैव विविधता, अच्छे वेट-लैंड और पर्याप्त भोजन-पानी के चलते स्थानीय पक्षियों सहित प्रवासी पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं को पसंद आने लगा है। यही कारण है कि यहां हर साल सैकड़ों प्रजाति के प्रवासी पक्षी उदयपुर आते हैं। इसी बीच उदयपुर शहर से सटे थूर गांव में ल्यूसिस्टिक कॉमन किंगफिशर पक्षी को देखा गया है। यह पक्षी भारत में पहली बार देखा गया है, जबकि विश्व में इसे तीसरी बार देखे जाने का दावा किया गया है।

शहर के नीमच माता स्कीम निवासी भानुप्रतापसिंह और हिरणमगरी सेक्टर पांच निवासी विधान द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने शहर से सटे थूर गांव के पास डांगियों का हुंदर गांव स्थित रेड सैल्यूट फार्म में देखा था, जबकि इसका घोंसला गांव के ही तालाब के पास मिला है।

भानुप्रतापसिंह और विधान द्विवेदी ने बताया कि दुर्लभ किंगफिशर के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी एकत्र करने के बाद शोध पत्र को इंडियन बर्ड वेबसाईट में इस खोज को प्रमाणित करने के लिए भेजा था, जहां से दो दिन पूर्व ही उनकी इस खोज को प्रमाणित किया है। भोजन बताया गया है कि ल्यूसिस्टिक कॉमन किंगफिशर पक्षी की भारत में यह पहली और विश्व में तीसरी साईटिंग है। यह पक्षी विश्व में पहली बार यूके में तथा दूसरी बार ब्राजील में देखा गया था।

तीन दिन की तलाश के बाद मिला घोंसला

पक्षी प्रेमी भानुप्रतापसिंह और विधान द्विवेदी

पक्षी प्रेमी भानुप्रताप और विधान ने बताया कि यह किंगफिशर उन्होंने 3 अगस्त 2021 को सुबह 6 बजकर 19 मिनट पर पहली बार फार्म परिसर में देखा था। इसके बाद उन्होंने इस किंगफिशर के फोटो और विडियो क्लिक कर इसके बारे में जानकारी जुटाई और इसकी नेस्टिंग की तलाश की। तीन-चार दिनों की तलाश के बाद इसके यहीं रहने और नेस्टिंग करने की पुष्टि हुई। तब इन्होंने पक्षी विशेषज्ञों से संपर्क कर इसकी साईटिंग के बारे में जानकारी दी। इसके बाद इन्होंने विशेषज्ञों की सहायता से रिसर्च पेपर तैयार कर इंडियन बर्ड वेबसाईट पर भेजा है।

ऐसा होता है ल्यूसिस्टिक किंगफिशर

राजपूताना सोसायटी ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के संस्थापक और भरतपुर के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. सत्यप्रकाश मेहरा ने बताया कि जिस तरह से मनुष्यों में सफेद दाग या सूर्यमुखी होते हैं उसी तरह से अन्य जीवों का एल्बिनो और ल्युसिस्टिक होना भी एक तरह की बीमारी है। इसमें भी एल्बिनो में तो पूरी तरह जीव सफेद हो जाता है व आंखे लाल रहती है, इसी प्रकार ल्यूसिस्टिक में शरीर के कुछ भाग जैसे आंख, चोंच, पंजों व नाखून का रंग यथावत रहता है तथा अन्य अंग सफेद हो जाते हैं।

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