नागपुर,(ARLive news)। कोरोना के इलाज में काम आने वाले इंजेक्शन रेमडेसिविर (Remdesivir) सहित कुछ और दवाओं की कालाबाजारी के आरोप में नागपुर के एक वार्ड बॉय को कोर्ट ने 5 साल के सश्रम कारावास के साथ आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई है।
वार्ड बॉय शेख आरिफ शेख रफीक (22 वर्ष) नागपुर के होप हास्पिटल में काम करता था। इसी वर्ष कोरोना की दूसरी लहर के दौरान 23 अप्रैल को जब उसके बैग की तलाशी ली गई तो बैग से दो रेमडेसिविर, चार पेंटाप्राजोल, एवं एक-एक मेरोपेनीम, पेप्रोसेलीन एवं सुसीनेक्स इंजेक्शन बरामद हुए। सारे इंजेक्शन उसने होप हास्पिटल की ही फार्मेसी से चुराए थे, और जरूरतमंद मरीजों को इनकी कालाबाजारी करना चाहता था।
इस घटना के बाद 24 अप्रैल को ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। अभियोजन पक्ष की ओर से शेख आरिफ के विरुद्ध 13 गवाह पेश किए गए थे। आज अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी.बी.घुगे ने उसे कई अलग-अलग धाराओं के तहत कुल पांच वर्ष के सश्रम कारावास एवं कुछ आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई।
गौरतलब है कि राजस्थान के जयपुर, उदयपुर, जोधपुर सहित अन्य जिलों में भी कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जीवन रक्षक साबित हो रहे रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी के मामले सामने आए थे। पुलिस ने हॉस्पिटल स्टाफ सहित कालाबाजारी में लिप्त आरोपियों को गिरफ्तार किया था। अब राजस्थान की जनता उम्मीद लगाए है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में आरोपियों को जल्द से जल्द सजा हो, ताकि एक-एक सांस के लिए जूझ रहे मरीजों की मौत का सौदा करने वालों को सबक मिल सके।


