उदयपुर,(ARLive news)। कोरोना से उभरने के बाद म्यूकर मायकोसिस (ब्लैक फंगस) चपेट में ले रहा है। उदयपुर में इसके केस बढ़ रहे हैं। ब्लैक फंगस के 6 मामले इन दिनों जीबीएच अमेरिकन हाॅस्पीटल पहुंचे हैं। इनके समय रहते ऑपरेशन कर ब्लैक फंगस दूर किया गया है, डाॅक्टर्स को किसी की आंख निकालनी पड़ी, तो किसी का जबड़ा निकालना पड़ा।
ग्रुप डायरेक्टर डाॅ. आनंद झा ने बताया कि कोविड पाॅजीटिव होने के बाद गुर्दे, मधुमेह और जिन संक्रमितों ने स्टेराॅइड्स लिए हों, ऐसे रोगियों में म्यूकर मायकोसिस का खतरा ज्यादा होता है। जानलेवा साबित हो रहे ब्लैक फंगस के जीबीएच अमेरिकन हाॅस्पीटल में 6 और जीबीएच जनरल हाॅस्पीटल, बेडवास में 2 रोगी पिछले आठ दिन में भर्ती हुए है। जीबीएच अमेरिकन हाॅस्पीटल के ईएनटी विभाग में भर्ती कर इनका उपचार किया जा रहा है और अब तक 5 मरीजों के ऑपरेशन किए जा चुके हैं। इनमें से दो की जोखिम भरी कई घंटों तक चली सर्जरी के बाद ब्लैक फंगस मुक्त करना संभव हुआ है।
म्यूकर मायकोसिस के 5 मरीजों का हो चुका है ऑपरेशन
डाॅ. आनंद झा ने बताया कि ऐसे रोगियों को उपचार देने के लिहाज से जीबीएच अमेरिकन हाॅस्पीटल के ईएनटी विभाग में वार्ड खोला गया है। इसके इलाज के लिए डाॅक्टर्स की टीम बनाई गई है जिसमें ईएनटी सर्जन मस्तिष्क एवं गर्दन रोग विशेषज्ञ डाॅ. कनिष्क मेहता, नैत्र रोग विशेषज्ञ डाॅ. स्वाति जैन, एंडोक्रायनोलाॅजिस्ट एवं जनरल फिजिशियन डाॅ. अभय जैन, नेफ्रोलाॅजिस्ट डाॅ. नीरज निराला और निश्चेतना विभाग से डाॅ. तरूण भटनागर की टीम ने मिलकर अब तक 5 रोगियों का ऑपरेशन किया है।
क्या है म्यूकर मायकोसिस (ब्लैक फंगस)
नाक के रास्ते होकर आंख, दिमाग और मुंह के तलवे, जबड़े तक फैलाव कर रहा है। समय पर पता लगाकर उपचार नहीं लेने की स्थिति में फैलाव इतना तेज गति से बढ़ता मिल रहा है कि ब्लैक फंगस रोगी की हड्डियां खाकर खोखला कर देता है। जिन मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उनमें यह जल्दी जकड़ता है। यही कारण है कि अब तक पहुंचे मरीजों में 20 वर्षीय युवक तो 70 वर्षीय वृद्ध भी शामिल है। विशेषज्ञों के अनुसार यह ब्लैक फंगस कैंसर से भी तेजी से फैलाव करता है।
समय पर इलाज जरूरी
डाॅ. कनिष्क मेहता के अनुसार इस फंगस का फैलाव रोकने के लिए एंटी फंगल इंजेक्शन (एंफोटेरिसिव-बी) लगाना जरूरी होता है। इसकी इन दिनों कमी के कारण यह फैलाव कर जाता है। इसमें ऑपरेशन भी विकल्प है, जिसे जितना जल्दी इलाज मुहैया होता है तो फंगस को उतनी ही जल्दी बढ़ने से रोका जा सकता है। जल्द ही उपचार मिलने से अंग पूरी तरह खराब नहीं हो पाता है, और अंग को बगैर निकाले भी उपचार संभव हो सकता है। लेकिन इसके लिए समय से चिकित्सकों तक पहुंचना जरूरी है।



