नई दिल्ली,(ARLive news)। दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई करते हुए केन्द्र सरकार को आदेश दिया कि अगले आदेश तक दिल्ली को हर रोज 700 मिट्रिक टन ऑक्सीजन देनी ही पड़ेगी। सख्ती दिखाते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आदेश जारी किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब हम 700 मीट्रिक टन कह रहे हैं तो इतनी ही ऑक्सीजन दीजिए। हमें सख्त कदम उठाने को मजबूर न करें।
अदालत की यह तल्खी इसलिए थी, क्योंकि उसने गुरुवार को ही केंद्र से कह दिया था कि दिल्ली को 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन देनी ही पड़ेगी। इसके बावजूद दिल्ली सरकार की शिकायत आई कि उसे पूरी ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने बताया कि आज सुबह 9 बजे तक दिल्ली को 89 मीट्रिक टन ऑक्सीजन मिली थी और 16 मीट्रिक टन ट्रांसपोर्टेशन में थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि ऑक्सीजन के ऑडिट के लिए एक्सपर्ट पैनल बना दिया गया है, ताकि हर राज्य की जरूरत पता की जा सके।
राजस्थान की जरूरत के अनुसार केन्द्र ऑक्सीजन आवंटन बढ़ाएं : मुख्यमंत्री गहलोत
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राजस्थान में ऑक्सीजन के अपर्याप्त आवंटन पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। मंत्रिपरिषद ने कहा कि राजस्थान में कोरोना संक्रमितों की बड़ी संख्या के अनुपात में केन्द्र सरकार द्वारा किया गया आवंटन नाकाफी है।
जामनगर से अनावंटित 200 मेट्रिक टन ऑक्सीजन की मात्रा में से राजस्थान को अधिकतम आवंटन किया जाए। क्योंकि वर्तमान में कोविड रोगियों के लिए प्रदेश में ऑक्सीजन की आवश्यकता 600 एमटी से अधिक पहुंच गई है और 15 मई तक इसके लगभग 795 एमटी तक हो जाने का अनुमान है। ऐसे में, केन्द्र सरकार राज्य की आवश्यकता के अनुरूप जल्द-से-जल्द ऑक्सीजन का आवंटन बढ़ाए।
कर्नाटक को भी सप्लाई बढ़ानी पड़ेगी
कर्नाटक को ऑक्सीजन सप्लाई बढ़ाने के मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने बुधवार 5 मई को केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि कर्नाटक को ऑक्सीजन सप्लाई 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर हर रोज 1200 मीट्रिक टन की जाए। केंद्र सरकार ने इस आदेश को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश को लेकर कोई शंका नजर नहीं आती और इसके खिलाफ केंद्र की अपील पर सुनवाई की कोई वजह भी नहीं दिख रही।


