अहमदाबाद,(ARLive news)। गुजरात के चर्चित इशरत जहां एनकाउंटर केस में बुधवार को सीबीआई कोर्ट ने क्राइम ब्रांच के तीन अधिकारियों आईपीएस गिरीश सिंघल, रिटायर्ड डीएसपी तरुण बारोट और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर अंजू चौधरी को बरी कर दिया है।
कोर्ट ने कहा कि इशरत जहां लश्कर-ए-तैयबा की आंतकी थी और इस खुफिया रिपोर्ट को नकारा नहीं जा सकता। कोर्ट कहा कि इस बात के सबूत हैं कि इशरत जहां आतंकी थी और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी निभाई, इसलिए तीनों अधिकारियों को निर्दोष मानते हुए बरी किया जाता है।
गौरतलब है कि सीबीआई कोर्ट ने इशरत जहां फर्जी एनकाउंटर केस में आरोपी बनाए गए तत्कालीन आईपीएस डीजी बंजारा और एनके अमीन को मई 2019 में ट्रायल से पहले ही डिस्चार्ज कर दिया था।
ये है पूरा मामला
गौरतलब है कि 15 जून 2004 को मुंबई की मुंबरा निवासी 19 साल की युवती इशरत जहान और जावेद शेख के साथ प्रणेश पिल्लई, अमजद अली अकबर अली राणा और जीशान जोहर को पुलिस एनकाउंटर में अहमदाबाद के बाहर मार दिया गया था। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि इन चार लोगों के आंतकवादियों से संबंध थे और इन्हें यहां तत्कालीन गुजरात सीएम नरेन्द्र मोदी को मारने के लिए भेजा गया था।
इशरत की मां और पिल्लई के पिता ने कोर्ट में अर्जी लगाकर मामले की जांच करने और एनकाउंटर में शामिल पुलिस अधिकारियो के खिलाफ कार्रवाही की गुहार लगायी थी। मामले की जांच के लिए कोर्ट ने एक एसआईटी का गठन किया था।
स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम ने इसके फर्जी एनकाउंटर केस होने का दावा किया था। इसके बाद कोर्ट ने यह केस सीबीआई को जांच के लिए ट्रांसफर कर दिया था। सीबीआई ने तत्कालीन डीजीपी पीपी पांडे, डीआईजी डीजी बंजारा और जीएल सिंघल सहित सात पुलिस अधिकारियों को आरोपी बनाते हुए 2013 में पहली चार्जशीट पेश की थी। केस में सीबीआई ने इनको साजिश रचने, अपहरण और हत्या का आरोप मानते हुए चार्जशीट पेश की थी।


