नई दिल्ली,(ARLive news)। कृषि कानून के विरोध में दिल्ली बाॅर्डर पर 21 दिन से जारी किसान आंदोलन में आज बुधवार को संत बाबा राम सिंह ने आंदोलन के समर्थन में खुद को गोली मारकर खुदकुशी कर ली। संत राम सिंह ने मरने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा और उसमें लिखा कि यह “जुल्म के खिलाफ आवाज है”।
संत बाबा राम सिंह 65 वर्षीय थे और करनाल के सिंघरा गांव के रहने वाले थे। वे सिंघरा के ही गुरूद्वारा साहिब नानकसर में ग्रंथी थे। बताया जा रहा है कि उनके लाखों की सुख्या में अनुयायी हैं। ऐसे में संत बाबा की मौत इस आंदोलन के स्वरूप को कितना बड़ा कर देगी, इस बात का किसी को अंदाजा नहीं है।
सरकारी जुल्म के खिलाफ रोष में मैं आत्मदाह कर रहा हूं
बाबा राम सिंह ने लिखा, किसानों का दुख देखा नहीं जा रहा है। अपने हक के लिए सड़कों पर किसानों को देखकर बहुत दिल दुख रहा है। सरकार न्याय नहीं दे रही है। जुल्म है। जुल्म करना पाप है। जुल्म सहना भी पाप है। उन्होंने आगे लिखा, किसानों के हक और जुल्म के खिलाफ किसी ने कुछ नहीं किया। किसी ने कुछ किया है, कइयों ने सम्मान, पुरुस्कार वापस किए हैं, रोष जताया, सरकारी जुल्म के खिलाफ रोष में मैं आत्मदाह कर रहा हूं। यह जुल्म के खिलाफ आवाज है, तो किसानों के हक में आवाज है। वाहे गुरु जी दा खालसा, वाहे गुरु जी दी फतेह।
आंदोलन के समर्थन में आज ही किसानों के साथ कोंडली बाॅर्डर पहुंचे थे
संत राम सिंह बुधवार को ही साथी किसानों के साथ कार से कोंडली बाॅर्डर पहुंचे थे। उनके साथी गुरमीत ने बताया राम सिंह ने सभी से कहा कि तुम स्टेज पर जाकर अरदास करो। उनके कहने पर हम अरदास करने मंच पर गए और कार का चालक चाय पीने के लिए चला गया। इसी दौरान उन्होंने खुद को गोली मार ली। जिसके बाद साथी लोग उन्हें पानीपत के अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। जहां से उनका शव करनाल ले जाया गया।



