उदयपुर,(ARLive news)। कोरोना काल में स्कूल-काॅलेज बंद हैं, हालां कि छात्रों का कोर्स पूरा करवाने के लिए ऑनलाइन क्लास चल रही हैं। अभी तक तो स्कूल प्रबंधन के खिलाफ फीस मांफी या फीस डिस्काउंट को लेकर पेरेन्ट्स ही एसोसिएशन के बैनर तले हाईकोर्ट गए थे, अब काॅलेज छात्रों ने भी काॅलेज फीस में डिस्काउंट की मांग कर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के लाॅ काॅलेज के छात्र सिद्धार्थ पिल्लई की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सुखाड़िया विश्वविद्यालय के मुख्य सचिव और रजिस्ट्रार को नोटिस भेजा है। सुविवि के लाॅ काॅलेज के छात्र सिद्धार्थ पिल्लई व अन्य ने काॅलेज फीस में डिस्काउंट के लिए जोधपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
विद्यार्थियों के मूल अधिकार का हनन है अनुचित फीस वसूली
अधिवक्ता सज्जन सिंह राठौड़ ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष मार्च के बाद शिक्षण संस्थाओं में मौजूद रहकर शिक्षण कार्य स्थगित कर दिए गए थे, याचिकाकर्ता तब से ऑनलाइन तकनीक से ही पढ़ाई कर रहे हैं। अगस्त, सितंबर में जब नया अकादमिक सत्र शुरू हुआ तो मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय ने छात्रों से पूरी फीस ली, जबकि काॅलेज में फिजिकली उपस्थित नहीं होने से वे विश्वविद्यालय या काॅलेज की किसी भी अन्य सुविधाओं का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
सज्जन सिंह राठौड़ ने कहा फीस में साइकिल स्टैंड, लाइब्रेरी, रीडिंग रूम, जरनल, मूट कोर्ट, लीगल एड कैंप, एक्सटेंशन लेक्चर, मनोरंजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम सहित अन्य मदों में राशि छात्रों से वसूली गयी है। छात्र ने जिन सुविधाओं का उपयोग ही नहीं किया, उनकी भी फीस वसूलना संविधान के आर्टिकल 21 के तहत विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन है।


