जयपुर,(ARLive news)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह के आधार पर प्रदेशवासियों से अपील की है वे कोरोना महामारी को देखते हुए इस वर्ष दीपावली का त्यौहार स्व-अनुशासन में रहकर मनाएं और पटाखों के प्रयोग से बचें। गहलोत ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के साथ गहन विचार-विमर्श किया। सभी विशेषज्ञों की राय थी कि पटाखों से होने वाला धुआं और प्रदूषण आमजन के साथ-साथ कोरोना संक्रमित रोगियों तथा कोरोना से ठीक हुए व्यक्तियों के लिए विशेष रूप से घातक है।
लगभग 2 घण्टे चली बैठक में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजाबाबू पंवार, एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुधीर भण्डारी, पूर्व प्राचार्य डॉ. वीरेन्द्र सिंह, एसएमएस अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रमन शर्मा, डॉ. अशोक अग्रवाल सहित अन्य चिकित्सकों ने महामारी के वैश्विक परिदृश्य, प्रदेश में कोरोना रोगियों के इलाज, संक्रमण से बचाव और पटाखों के दुष्प्रभाव पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
मानवाधिकार आयोग ने पटाखों के उपयोग को प्रतिबन्धित करने के निर्देश दिए
मुख्यमंत्री ने कहा कि सर्वाेच्च न्यायालय ने कई बार आतिशबाजी से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल प्रदेश के जिलों में पहले से ही पटाखों के उपयोग पर प्रतिबन्ध है। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने पटाखों के उपयोग को प्रतिबन्धित करने को लेकर दिशा-निर्देश दिए हैं। साथ ही, विशेषज्ञ चिकित्सक कोरोना संक्रमण की स्थिति में लगातार पटाखों के उपयोग से बचने के लिए सचेत कर रहे हैं। ऎसे में, सभी के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आत्म-अनुशासन में रहकर दीपावली मनाना जरूरी है।
गहलोत ने चिकित्सकों को निर्देश दिए कि वे कोरोना वायरस के पैटर्न में बदलाव का अध्ययन कर अपना चिकित्सकीय प्रोटोकॉल निर्धारित करें। उन्होंने कहा कि यह देखने में आ रहा है कि संक्रमित रोगियों के नेगेटिव होने के बाद भी उन पर वायरस का असर बरकरार रहता है। विभिन्न जिलों में कोरोना रोगियों का इलाज कर रहे डॉक्टरों के साथ इस पैटर्न की जानकारी साझा करें और उन्हें बेहतर इलाज के लिए समय-समय पर समुचित सलाह देते रहें।


