उदयपुर,(ARLive news)। डूंगरपुर-उदयपुर में चार दिन चला उपद्रव भले ही अब शांत हो गया हो और हाईवे वापस शुरू हो गया हो, लेकिन इस क्षेत्र में रहने वाले सामान्य वर्ग के लोगों में खौफ खत्म नहीं हुआ है। इस बीच आज मंगलवार को भाजपा से पूर्व मंत्री रह चुके मदन दिलावर ने सरकार के एक आईपीएस, एक आरएएस और बीटीपी नेताओं पर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र को अशांत करने वाले लोगों का सहयोग करने का बड़ा विवादित आरोप लगाया है। हालां कि इस संबंध में उन्होंने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए हैं।
मदन दिलावर ने प्रेसवार्ता में कहा मेवाड़ का आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र प्राकृतिक संपदाओं से भरा है और यहां के आदिवासी लोग हमेशा से शांत प्रकृति के रहे हैं। लेकिन पिछले कुछ सालों से यहां के आदिवासियों को बाहरी तत्वों द्वारा बहकाया और भड़काया जा रहा है, कि उनकी परंपराएं खतरे में हैं और इस क्षेत्र को अशांत करने का प्रयास किया जा रहा है।
नक्सलवादियों से ट्रेनिंग लेकर आते हैं और यहां आदिवासियों को बहकाते हैं
दिलावर ने कहा कि क्षेत्रीय लोगों से बातचीत में पता चला है कि यहां बाहर से कई लोग आते हैं और ट्रेनिंग देते रहे हैं। इनकी यहां मीटिंग होती हैं। इसके लिए गुजरात से बबिता कश्यप, विजयी गुंजल दिल्ली से और बरखा लखारा छत्तीसगढ़ से यहां आती रहती हैं। कई लोग नक्सलियों से ट्रेनिंग लेकर आते हैं और यहां लोगों को भड़काते हैं।
पूर्व मंत्री दिलावर ने आरोप लगाया कि इसमें बीटीपी प्रदेशाध्यक्ष वीराराम, अध्यापक भंवर परमार, कांतिलाल आदिवासी, प्रोफेसर मणिलाल गरासिया, मांगीलाल, राजकुमार रोत ये लिप्त हो सकते हैं। इनके पिछले 6 महीने के रिकाॅर्ड खंगाले जाएं। इनकी संपत्तियों की जांच हो कि कहां से पैसा आ रहा है।
दिलावर ने कहा मित्रों इसमें प्रशासनिक अधिकारी पीछे नहीं है। प्रशासनिक अधिकारी महावीर खराड़ी और पुलिस अधिकारी कालूराम रावत इनके लिए धन इकट्ठा करते है और इनको धन उपलब्ध करवाने में सहयोग करते हैं। सरकार ने इन्हें मौन स्वीकृति दी हुई है, क्यों कि पिछले दिनों बीटीपी ने राज्य में कांग्रेस सरकार बचाने के लिए अपना समर्थन दिया था। सरकार वाकैय इस क्षेत्र की बेहतरी चाहती है तो राज्य सरकार अच्छी जांच एजेंसी से निस्पक्ष जांच करवाए, उसके अनुसार इस क्षेत्र को अशांत करने की साजिश करने वालों पर कार्यवाही करे।


