उदयपुर,(ARLive news)। झीलों की नगरी उदयपुर में झाड़ोल रोड पर अलसीगढ़ में इन दिनों दावा किया जा रहा है कि यहां एक प्राइवेट फिल्म सिटी बनायी जा रही है। जिसे नाम दिया गया है “कलाक्षेत्र”। मूलतः उदयपुर घंटाघर थाना क्षेत्र हाल मुंबई निवासी सुनील भट्ट और जसवंत परमार इस फिल्म सिटी के फाउंडर हैं। इन्होंने दावा किया है कि 150 बीघा जमीन पर बनने वाली यह फिल्म सिटी अगले एक साल में तैयार हो जाएगी, यहां एक स्टूडियो तैयार भी हो गया है। लेकिन इन्होंने इस फिल्म सिटी के इनवेस्टर्स का अभी तक कोई खुलासा नहीं किया है।
सुनील भट्ट खुद उदयपुर के घंटाघर थाने के हिस्ट्रीशीटर है और करीब 15 सालों से मुंबई में रह रहे हैं। इनके खिलाफ उदयपुर में पहला केस 1999 में भूपालपुरा थाने में नकली नोट मामले से संबंधित आरोप में दर्ज हुआ था। इसीलिए बार-बार सवाल उठ रहा है कि फिल्म सिटी के इनवेस्टर्स कौन हैं.?
अभी तक सुनील भट्ट ने दावा किया है कि इसमें उन्होंने खुद का पैसा लगाया है, लेकिन आगे इस प्रोजेक्ट में इनवेस्टर्स कौन हैं, इसका खुलासा नहीं किया है। वर्ष 2008 के बाद से पुलिस के पास ऐसा कोई रिकाॅर्ड नहीं है, कि ये पिछले 12 सालों में कब-कब उदयपुर आए, उदयपुर और मुंबई में किस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त रहे हैं और किस प्रकार के लोगों के संपर्क में रहे हैं।
पुलिस रिकाॅर्ड में तो यह जानकारी भी नहीं है कि ये मुंबई में क्या व्यापार करते हैं। ऐसे में पुलिस के लिए यह देखना और जरूरी हो जाता है कि इनके मुंबई शिफ्ट होने के अचानक 15 साल बाद उदयपुर में लाॅन्च किए गए कलाक्षेत्र फिल्म सिटी प्रोजेक्ट में निवेशक कौन-कौन है, और निवेश राशि कहां से आ रही है।
एडीजी दिनेश एमएन के उदयपुर एसपी रहते समय खुली थी हिस्ट्रीशीट
सुनील भट्ट का मुंबई शिफ्ट होने से पहले उदयपुर में कुछ अच्छा रिकाॅर्ड नहीं रहा है। वे उदयपुर के घंटाघर थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं। उनकी हिस्ट्रीशीट आईपीएस दिनेश एमएन के उदयपुर एसपी रहते समय खोली गयी थी। घंटाघर थाने में बनी इनकी हिस्ट्रीशीट के अनुसार उस समय इनके खिलाफ भूपालपुरा थाने में नकली नोट से संबंधित, मारपीट, अहमदाबाद में हत्या से संबंधित आरोप में मामले दर्ज हो चुके थे।
उदयपुर में एसपी दिनेश एमएन के रहते समय सुनील भट्ट उदयपुर से मुंबई शिफ्ट हो गए थे। पुलिस रिकाॅर्ड में इनके लिए 2008 में एक नोट भी है, जिसमें लिखा है कि यह खतरनाक प्रवृति के हैं और इन दिनों मुंबई में रहकर व्यापार कर रहे हैं। हालां कि पुलिस रिकाॅर्ड में यह स्पष्ट नहीं है कि यह मुंबई में रहकर क्या व्यापार करते हैं।
उदयपुर में 2 साल से एक्टिव, लेकिन पुलिस को नहीं पता.!
सुनील भट्ट ने 29 अगस्त को की गयी प्रेस वार्ता में बताया कि इस फिल्म सिटी प्रोजेक्ट पर वे 2 साल से काम कर रहे हैं। ऐसे में पिछले दो साल से उनका मुंबई से उदयपुर आना-जाना लगा रहा है। लेकिन पुलिस थाने में बनी हुई इनकी हिस्ट्रीशीट फाइल में 2008 के बाद का कोई रिकॉर्ड नहीं दर्ज है।
जबकि इस बात का प्रावधान है कि पुलिस को किसी भी हिस्ट्रीशीटर की हर एक्टिविटी पर नजर रखनी होती है। अगर वह बाहर शिफ्ट हो गया है और वापस आता है, तो इसकी जानकारी संबंधित पुलिस थाने में दी जाती है। पुलिस को बीच-बीच में हिस्ट्रीशीटर की एक्टिविटी चेक करनी होती है, कि वह कहां रह रहा है, क्या काम करता है। लेकिन उदयपुर घंटाघर थाने में ऐसा कोई रिकाॅर्ड सुनील भट्ट की हिस्ट्रीशीट फाइल में नहीं है।
थानाधिकारी भवानी सिंह ने बताया कि ये तो मुंबई रहते हैं, पिछले काफी सालों से इनका उदयपुर में रहने का या अन्य कोई रिकाॅर्ड नहीं है।
अभी तक नहीं है कोई सरकारी सबसीडी
अब अचानक 15 साल बाद सुनील भट्ट का उदयपुर में 150 बीघा जमीन पर बतौर फाउंडर फिल्म सिटी प्रोजेक्ट को लाॅन्च करना काफी चौंकाने वाला है। यह फिल्म सिटी पूरी तरह प्राइवेट है। इस प्रोजेक्ट को अभी तक कोई सरकारी सबसीडी नहीं मिली है।
कलाक्षेत्र प्राइवेट फिल्मसिटी है
पिछले 15 सालों से फिल्म सिटी संघर्ष समिति सरकार से उदयपुर में फिल्म सिटी की मांग कर रही है। उदयपुर फिल्म सिटी संघर्ष समिति पदाधिकारी ने बताया कि वे जिस फिल्म सिटी की मांग कर रहे हैं, वह सरकार के अंतर्गत होगी। कलाक्षेत्र फिल्म सिटी प्राइवेट है। प्राइवेट फिल्म सिटी भी होती है, मुंबई में तो कई प्राइवेट फिल्म सिटी हैं। इससे उनके उदयपुर फिल्म सिटी लाने के आंदोलन पर प्रभाव पड़ सकता है। इस प्राइवेट फिल्मसिटी के आने से उदयपुर फिल्म सिटी को लेकर सरकार का क्या रूख रहता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।


