उदयपुर,(ARLive news)। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून रविवार सुबह सभी योग करने की तैयारियों में जुटे हैं। जो नियमित योग करते हैं, वे भी और जो नियमित योग नहीं करते हैं, वे भी इस दिन योग कर साल भर योग करने का प्रण जरूर लेते हैं। ऐसे में हम आपको उदयपुर के एक ऐसे आदियोगी ग्रुप के बारे में बताते हैं, जिन्होंने योग और प्राकृतिक चिकित्सा का मेल कर इसे ज्यादा कारगर बना दिया है।
आदियोगी ग्रुप की खासियत यह है कि यह 12 प्रकार की मिट्टी के मिश्रण से शरीर पर लेप करते हैं और फिर योग अभ्यास करते हैं।
आदियोगी ग्रुप के संस्थापक जसवंत मेनारिया ने बताया कि पिछले 7 सालों में आदियोगी ग्रुप से जुड़कर कई युवा न सिर्फ योग में पारंगत हुए हैं, बल्कि देशभर में योगा ट्रेनर के रूप में भी काम कर रहे हैं। कोरोना काल में बढ़े तनाव को कम करने के लिए यह ग्रुप योगा के साथ प्राकृतिक चिकित्सा को जोड़कर दिनचर्या में उतारने पर जोर दे रहा है। इसके लिए वे निशुल्क योगा क्लासेज भी चला रहे हैं, जिसमें वे मिट्टी के मिश्रण का शरीर पर लेप कर योग अभ्यास करने की ट्रेनिंग दे रहे हैं। मिट्टी खेत या प्राकृतिक स्थल से ही लेते हैं।
मुहिम को ऑनलाइन भी खूब पसंद किया जा रहा है
उनकी यह प्राकृतिक चिकित्सा के साथ योगा करने की मुहिम को ऑनलाइन भी खूब पसंद किया जा रहा है। बीते 2 सप्ताह में करीब 2 दर्जन से ज्यादा युवाओं को आदियोगी ग्रुप विशेष योग का प्रशिक्षण दे चुका हूं। योगा में पीएचडी कर रहे जसवंत मेनारिया ने बताया प्राचीनकाल से गर्मियों के दिनों में मिट्टी के लेप और ठंडे पानी के रोजाना उपयोग से शरीर का तापमान भी पूरे दिन नियंत्रित रहता हैए बल्कि मिट्टी के लेप से शरीर की अशुद्धियां भी बाहर आ जाती है और रोम छिद्र खुल जाते हैए जो मस्तिष्क को भी शिथिलता प्रदान करते है। त्वचा रोगों के साथ मानसिक रोगों में भी यह विधि बेहद महवपूर्ण मानी जाती है। लेप कर योग अभ्यास करने से योग ज्यादा कारगर साबित होता है।
प्राचील काल से इस थैरेपी का होता आया है उपयोग
मेनारिया कहते है कि 11 अलग अलग तरह के आसान पूर्ण करवाते जाते है। आसान पूर्ण होने के बाद भी पानी को एक्सप्रेशर पॉइंट के हिसाब से छांटते हुए पूरे शरीर को धोया जाता है।
ग्रंथों में कहा गया है इंसान का शरीर शित, जल, पावक, गगन और समीर पंच तत्वों से बना है। प्राकृतिक रूप से मिट्टी में ये पांचों तत्व मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर को शीतलता के साथ उसे निरोगी भी बनाते हैं। मिट्टी को आयुर्वेद में जीवन का अस्तित्व माना गया है। योगा में पीएचडी कर रहे जसवंत मेनारिया कहते है कि अंग्रेजी में मड बाथ यानी मिट्टी से नहाना बोला जाता है और हमारे देश में प्राचीन समय से ही कई बीमारीयों को दूर करने के लिए इस थैरेपी का इस्तेमाल किया जाता रहा है।

