जयपुर/उदयपुर,(ARLive news)। राजस्थान सरकार कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में भले ही जनहित के कई निर्णय ले रही हो, लेकिन उन निर्णयों की क्रियान्विती जिन अधिकारी-कर्मचारियों को करवानी होती है, उन तक निर्णयों की सही और विस्तृत सूचना नहीं पहुंच रही है। इस बात का खामियाजा जनता को उठाना पड़ रहा है।
ऐसा हुआ जब राज्य सरकार ने राज्य की सीमाओं पर अवैध आवाजाही रोकने के लिए सीमाएं सील करने के आदेश दिए। राजस्थान सरकार के इस आदेश की विस्तृत जानकारी न तो पड़ोसी राज्यों के पास गयी और न ही बॉर्डर पर लगे राजस्थान के पुलिस व अन्य विभाग के कर्मचारियों के पास पहुंची। बॉर्डर पर तैनात पुलिस ने सभी सीमाएं सील कर दी और उन प्रवासियों को भी बॉर्डर पर रोक दिया जो दूसरे राज्य से जारी अनुमति पत्र (पास) लेकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर बॉर्डर तक पहुंचे थे।
राजस्थान के सभी बॉर्डर और महाराष्ट्र-गुजरात बॉर्डर पर जब अफरा-तफरी मची तो गहलोत सरकार ने शुक्रवार रात विस्तृत आदेश फिर जारी किया।
ई-पास है तो राजस्थान में प्रवेश पर रोक नहीं

इस घटनाक्रम से सरकार को सबक लेना चाहिए कि सरकार सिर्फ आदेश जारी नहीं करे, बल्कि उन आदेशों की सही पालना हो रही है, उन आदेशों की सही सूचना अधिनस्थों तक पहुंच रही है, यह भी सुनिश्चित करें। अन्यथा सरकार जनहित के कितने ही निर्णय लेले, लेकिन अगर उसकाल लाभ जनता तक नहीं पहुंचा तो किसी निर्णय का कोई फायदा नहीं होगा। दो राज्यों की सरकार और राज्य के अंदर अधिकारियों-कर्मचारियों के आपसी सूचनातंत्र और सामंजस्य की कमी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा।


