नई दिल्ली,(ARLive news)। हाईकोर्ट के आदेश और सख्त टिप्पणी के बाद भी दिल्ली में हुए दंगों को लेकर भड़काउ बयान देने वालों पर केस दर्ज करने से पुलिस बच रही है। इस मामले में हाईकोर्ट में दूसरे दिन गुरूवार को भी सुनवायी हुई। हाईकोर्ट में पुलिस ने दलील दी कि मौजूदा हालात को देखते हुए भड़काऊ बयान देने वालों पर केस दर्ज करना ठीक नहीं। इससे दिल्ली में शांति और हालात सामान्य करने में मदद नहीं मिलेगी।
वहीं केजरीवाल सरकार ने दिल्ली दंगों में पीड़ितों के मुआवजा दिए जाने का एलान किया है। केजरीवाल ने कहा मृतकों के पीड़ितों को 10-10 लाख रूपए मुआवजा दिया जाएगा। दंगों में दिव्यांग हुए उन्हें 5-5 लाख रूपए, गंभीर घायलों को 2-2 लाख रूपए और जिनके घर, दुकान जलाए गए उन्हें 5-5 लाख रूपए मुआवजा दिया जाएगा। केजरीवाल ने कहा कि जिन लोगों ने दंगे भड़काए उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाए और अगर उसमें कोई आप पार्टी का नेता है तो उसके खिलाफ दोगुनी सख्ती के साथ कार्यवाही हो।
पुलिस भड़काउ भाषण देने वालों का बचाव क्यों का रही है
हालां कि हाईकोर्ट में पुलिस की दलील से उसकी मंशा जरूर दिख रही है। पहले तो पुलिस ने भड़काउ बयान देने वालों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर उनके हौंसले बुलंद किए और अब जब दंगे हुए और हाईकोर्ट ने भड़काउ बयान देने वालों के खिलाफ कार्यवाही के आदेश दिए तो पुलिस अपनी नई दलील लेकर कोई के सामने आ गयी।जबकि पुलिस दिल्ली दंगों के मामले में 48 एफआईआर दर्ज कर 106 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, तो भड़काउ भाषण देने वालों का बचाव क्यों का रही है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने बुधवार को कपिल मिश्रा समेत 3 भाजपा नेताओं के भड़काऊ बयानों पर एफआईआर में देरी पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी। जस्टिस एस मुरलीधर ने पुलिस से पूछा था. क्या हिंसा भड़काने वालों पर तुरंत एफआईआर दर्ज करना जरूरी नहीं हैघ् हिंसा रोकने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाने की जरूरत है। दिल्ली में एक और 1984 नहीं होना चाहिए।


