उदयपुर,(ARLive news)। सहेलियों की बाड़ी के सामने स्थित हेंडीक्राफ्ट शो रूम राजस्थली टेक्सटाइल के नाम के आगे आरटीडीसी लगाने के मामले में एआर लाइव न्यूज की खबर का असर हुआ है। शनिवार को राजस्थान टूरिज्म डवलपमेंट कोरपोरेशन और नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची। टीम ने शो रूम के बाहर लगे बोर्ड जिस पर बड़े-बड़े शब्दों में आरटीडीसी लिखा था, उसे हटवाया और दूसरे बैनर पर लिखे आरटीडीसी शब्द पर टेपिंग चिपकवायी
राजस्थान टूरिज्म डवलपमेंट कोरपोरेशन के जनरल मैनेजर सुनील माथुर ने बताया कि टीम मौके पर गयी हैं। शोरूम संचालक को ऐसा दोबारा नहीं करने के लिए चेतावनी दी गयी है और मौके पर लगा आरटीडीसी का बोर्ड हटवाया गया है। शोरूम पर मिले प्रतिनिधि से आवश्यक दस्तावेज भी मांगे गए हैं। गौरतलब है कि एआर लाइव न्यूज ने आरटीडीसी के नाम से चल रहा निजी शोरूम खबर प्रकाशित कर इस मुद्दे को प्रशासन और आरटीडीसी के अधिकारियों के ध्यान में लाए थे।
“राजस्थली टेक्सटाइल के प्रोपराइटर भारत सिंह बागरेचा का कहना है कि उनकी फर्म का नाम राजस्थली टेक्सटाइल डवलपमेंट कोरपोरेशन है और इसका जीएसटी रजिस्ट्रेशन भी है। इसलिए हमने आरटीडीसी लिखा था।
चूंकि डवलपमेंट कोरपोरेशन शब्द अक्सर सरकारी विभागों के नाम के साथ लगा होता है, ऐसे में एआर लाइव न्यूज ने इसके बारे जानकारी जुटाई।”
पड़ताल में रोचक बात आयी सामने
डवलपमेंट कोरपोरेशन सरकारी विभाग होते है, तो ये कैसे..?
राजस्थान में ट्रेडमार्क (व्यापार नाम) रजिस्ट्रेशन संबंधित कानूनी विषय विशेषज्ञ लॉ-मित्र एडवोकेट निखिल सोनी ने बताया कि जब सरकार किसी भी क्षेत्र में विकास की संभावनाओं को देखते हुए उसके लिए कोई बॉडी गठित करती है तो उसे अक्सर कोरपोरेशन या डवलपमेंट कोरपोरेशन नाम दिया जाता है। जैसे राजस्थान स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कोरपोरेशन, नेशनल रिसर्च डवलपमेंट कोरपोरेशन, हाउसिंग एंड अर्बन डवलपमेंट कोरपोरेशन सहित अन्य।
निखिल सोनी बताते है कि व्यापार नाम (ट्रेडमार्क) पंजीयन करने वाली शीर्ष केंद्रीय सरकारी संस्थान “कंट्रोलर जनरल ऑफ ट्रेडमार्क्स” डिपार्टमेंट ऑफ प्रोमोशन ऑफ इंडस्ट्रीज एंड इंटरनल ट्रेड, मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, भारत सरकार एवं ट्रेडमार्क एक्ट 1999 के अनुसार, आम ग्राहक को भ्रमित करने की नीयत से व्यापार नाम रखना एक ग़ैरकानूनी कृत्य है। द कंपनीज़ एक्ट 1956 व कंपनीज़ रूल्स के अनुसार भी इस प्रकार के व्यापार नाम जो अपने आप में किसी सरकारी संस्था होने का आभास करवाते हों जारी नहीं किये जाते हैं। इस प्रकार के नाम अधिकृत तौर पर केवल सरकारी या अर्ध सरकारी संस्थाओं को काम में लेने का अधिकार होता है।
इसलिए किसी भी निजी संस्था का ट्रेडमार्क कोरपोरेशन या डवलपमेंट कोरपोरेशन शब्द के साथ रजिस्ट्रेशन नहीं हो सकता है। क्यों कि कोरपोरेशन सरकारी विभाग होने का संकेत देता है।
अब यहां सवाल यह है कि जब यह नियम है तो राजस्थली टेक्सटाइल डवलपमेंट कोरपोरेशन शब्द कैसे लिख रहा है और इसका जीएसटी रजिस्ट्रेशन कैसे हुआ होगा..?
एक ही शहर में राजस्थली नाम से दो हेंडीक्राफ्ट शोरूम
इस पर निखिल सोनी ने बताया कि जीएसटी के रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थली टेक्सटाइल डवलपमेंट कोरपोरशन के बिजनेस का लीगल-नेम भारत सिंह बागरेचा है। संस्था के वे प्रोपराइटर हैं और जीएसटी में राजस्थली टेक्सटाइल डवलपमेंट कोरपोरेशन का पेन कार्ड नहीं बल्कि भारत सिंह बागरेचा का पेन कार्ड लगा है। जीएसटी रजिस्ट्रेशन के दौरान अधिकतर “लीगल नेम ऑफ बिजनेस” व “एड्रेस आईडी प्रूफ” पर ज्यादा फोकस किया जाता है।
इसमें फर्म संचालक की भी गलती नहीं होती। वह नाम जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए देता है और रजिस्ट्रेशन हो जाता है। अगर अधिकारी-कर्मचारी रजिस्ट्रेशन करने से मना करे तब फर्म मालिक को नियम पता चलेंगे। अक्सर ऐसा नहीं होता है।
ऐसे मामले सिर्फ उदयपुर ही नहीं देशभर में सामने आ जाएंगे। देशभर में जीएसटी रजिस्ट्रेशन के लिए जो खराब प्रेक्टिस चल रही है, उसके अनुसार तो कोई शहर, कस्बे में स्थानीय स्तर पर किसी नेशनल, इंटरनेशनल लेवल के ब्रांड के नाम से भी जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना चाहे तो हो ही जाएगा। उदयपुर में ही राजस्थली नाम से दो हेंडीक्राफ्ट शोरूम चल रहे हैं। राजस्थली नाम से उदयपुर के चेतक सर्किल पर एक और हेंडीक्राफ्ट शोरूम है। यह शोरूम सरकारी है और इसका नाम राजस्थली गवर्नमेंट एम्पोरियम है। जबकि राजस्थली नाम से दूसरा हेंडीक्राफ्ट शोरूम सहेलियों की बाड़ी के सामने स्थित है। यह प्राइवेट हेंडीक्राफ्ट शोरूम है और इसका नाम राजस्थली टेक्सटाइल डवपलपमेंट कोरपोरेशन बताया जाता है।


