AR Live News
Advertisement
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • Uttar Predesh
  • Gujarat (Hindi)
  • International
  • Expert Articles
  • Education
  • Entertainment
  • Youtube
  • Photo Gallery
  • Contact us
No Result
View All Result
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • Uttar Predesh
  • Gujarat (Hindi)
  • International
  • Expert Articles
  • Education
  • Entertainment
  • Youtube
  • Photo Gallery
  • Contact us
No Result
View All Result
AR Live News
No Result
View All Result
Home Home

सरकार की SC से अपील दोषियों को जल्द मिले सजा : निर्भया केस के लिहाज से अहम याचिका

arln-admin by arln-admin
January 23, 2020
Reading Time: 1 min read
supreme court seeks government reply on 144 petition of caa


Share on FacebookShare on TwitterShare on Whatsapp

नई दिल्ली.,(ARLive news)। केंद्र सरकार ने बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय से मौत की सजा की प्रक्रिया को स्पष्ट व तेज करने की मांग की है। गृह मंत्रालय ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिये दायर याचिका में तीन मुद्दों पर गुहार लगाते हुए 2014 के शत्रुघ्न चौहान मामले के फैसले को स्पष्ट करने की मांग की है। याचिका में इस फैसले में दिए गए निर्देशों का खारिज करने को ‘समय की जरूरत’ बताते हुए कहा गया है कि इस मामले में दोषियों के अधिकारों को ध्यान में रखते हुए दिशा-निर्देश दिए गए थे।

सरकार ने याचिका दाखिल करते हुए कहा है कि सजा देने की प्रक्रिया दोषी के बजाय पीड़ित के हित पर केंद्रित होनी चाहिए। साथ ही सरकार ने मांग की है कि मौत की सजा पा चुके दोषियों को दया याचिका खारिज होने के अधिकतम 14 दिन में फांसी देने का प्रावधान किया जाए।इस याचिका को निर्भया केस के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

निर्भया के दोषी कानूनी तिकड़मों से फांसी से बच रहे

इस मामले में भी चारों दोषी डेथ वारंट जारी होने के बाद भी कानूनी तिकड़मों का इस्तेमाल कर फांसी टालने में कामयाब हो रहे हैं। पहले 22 जनवरी को फांसी होनी थी, लेकिन एक दोषी मुकेश की दया याचिका के निपटारे में देरी से सजा टल गई। अब नए डेथ वारंट में मुकेश के साथ विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह और पवन की फांसी के लिए एक फरवरी की तारीख तय की गई है।

उस फैसले में पीड़ित और पीड़ित परिवार के मानसिक आघात, यातना आदि को नजरअंदाज किया गया था। उस फैसले के पहले और कई बाद भी जघन्य अपराधी अनुच्छेद-21 (जीवन एवं स्वंत्रतता का अधिकार) के सहारे न्यायिक प्रक्रियाओं का बेजा फायदा उठा रहे हैं। पीड़ितों के हित में जरूरी है कि नृशंस, जघन्य व भयावह अपराधियों को कानून से खेलने के मौका न मिले।

मंत्रालय ने याचिका में कहा है कि देश में आतंकवाद, दुष्कर्म व हत्या में मृत्युदंड का प्रावधान है। यह माना गया है कि दुष्कर्म का कृत्य न केवल आपराधिक है बल्कि देश की दंड संहिता में किसी भी सभ्य समाज के सबसे भयानक और अक्षम्य अपराध के तौर पर परिभाषित किया गया है। यह किसी महिला या समाज नहीं बल्कि मानवता के खिलाफ किया गया अपराध है।

Tags: #GovernmentFileApplication#NirbhayaCase#supremecourt

visitors

arlivenews
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • International
  • Expert Articles
  • photo gallery
  • Entertainment
  • Privacy Policy
  • Archives
  • Contact us

© 2019 All Rights Reserved by ARLive News .

error: Copy content not allowed
No Result
View All Result
  • Home
  • About us
  • National
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • Uttar Predesh
  • Gujarat (Hindi)
  • International
  • Expert Articles
  • Education
  • Entertainment
  • Youtube
  • Photo Gallery
  • Contact us

© 2019 All Rights Reserved by ARLive News .