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बीएन यूनिवर्सिटी : फार्मेसी प्रवेश में गड़बड़ी और परीक्षा में नकल मामले की जांच अब एसओजी के पास

छात्रों की असली परीक्षा होगी अब..?

arln-admin by arln-admin
January 20, 2020
Reading Time: 1 min read
BN UNIVERSITY pharmacy college admission or mass copying in exam case


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उदयपुर,(ARLive news)। शहर की नामी भूपाल नोबल (बीएन) विश्वविद्यालय केे फार्मेसी विभाग में प्रवेश में गड़बड़ी और छात्रों को नकल कराने संबंधी मामले की जांच अब राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप में पहुंच गयी है। एसओजी को बीएन के फार्मेसी कॉलेज के छात्र देवाराम के नाम से परिवाद प्राप्त हुआ है, जिसमें बीएन फार्मेसी कॉलेज के लेक्चरर हर्षवर्धन सिंह की नामजद शिकायत हैं। आरोप प्रवेश में गड़बड़ी और परीक्षा में नकल करवाने संबंधी हैं।

एसओजी के एडिएसपी हिम्मत सिंह ने बताया कि एक छात्र के नाम से परिवाद प्राप्त हुआ है। छात्र ने बीएन कॉलेज के लेक्चरर हर्षवर्धन सिंह के खिलाफ नामजद शिकायत दी है। पूरा मामला जानने और बयान के लिए उस छात्र को भी बुलाया गया है। इधर बीएन फार्मेसी विभाग से भी साल 2018-19 और 2019-20 सत्र में हुए छात्रों के प्रवेश से संबंधित दस्तावेज, फार्म, छात्रों की डिटेल, छात्र संख्या, कुल सीटें, फीस की रसीदें, टाइम टेबल और लेक्चरर हर्षवर्धन सिंह से संबंधित जानकारियां मांगी हैं।

चेयरपर्सन ने  माना, हां नकल की शिकायत आयी थी

बीएन संस्थान के विद्या प्रचारिणी सभा और बीएन यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के चेयरपर्सन गुणवंत सिंह झाला ने भी इस बात को माना है कि जून 2019 में हुई परीक्षा में छात्रों के नकल करने की शिकायत प्राप्त हुई थी। गुणवंत सिंह झाला ने बताया कि गत वर्ष जून में फार्मेसी कॉलेज के छात्रों के परीक्षा में नकल करने की शिकायत प्राप्त हुई थी। इस पर विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच कमेटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे। इस कमेटी की रिपोर्ट मुझे अभी प्राप्त नहीं हुई है। मैं अभी शहर में नहीं हूं। 24 जनवरी को आकर कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा कर अग्रिम कार्यवाही करेंगे।

यहां सवाल यह है कि इतने संवेदनशील मामले में भी आंतरिक जांच कमेटी क्यों आठ महीने के बाद भी चेयरपर्सन को रिपोर्ट नहीं दे सकी है। हालां कि अब बीएन विश्वविद्यालय के फार्मेसी कॉलेज के प्रबंधन के लिए मुश्किल बढ़ सकती हैं, क्यों कि मामला अब आंतरिक कमेटी से निकलकर राजस्थान पुलिस की एसओजी के पास पहुंच गया है।

मेरे नाना को टारगेट करने के लिए मुझे फंसाया जा रहा है : हर्षवर्धन सिंह

बीएन कॉलेज के लेक्चरर हर्षवर्धन सिंह से सवाल-जवाब

सवाल : आपके खिलाफ एसओजी में नामजद शिकायत गयी है, आप क्या कहेंगे.?

जवाब : जिस छात्र देवाराम ने शिकायत की है, वह वर्तमान में बीएन फार्मेसी में डिप्लोमा कोर्स का छात्र है। वह तो मना कर रहा है कि उसने एसओजी में कोई रिपोर्ट नहीं दी है। उसके नाम से शिकायत कर मुझे कोई जबरन फंसाने का प्रयास कर रहा है।

सवाल : लोग आपको ही क्यों फंसाने का प्रयास करेंगे.?

जवाब : मेरे नाना पदम सिंह जी बीएन यूनिवर्सिटी में एग्जीक्यूटिव पोस्ट पर रह चुके हैं। उन्होंने तब यूनिवर्सिटी के यूजीसी अप्रूव्ड नहीं होने का मुद्दा उठाया था। इसके चलते उनके कई विरोधी भी थे, वे लोग उनको टारगेट करने के लिए मुझे फंसाने का प्रयास कर रहे हैं।

सवाल : आपका मतलब यूनिवर्सिटी यूजीसी एप्रूव्ड नहीं है.?

जवाब : हां बीएन यूनिवर्सिटी यूजीसी एप्रूव्ड नहीं हैं। हमारे यहां नेपाल के बच्चे भी पढ़े हैं, जब ये बच्चे अपने देश में यहां का सर्टिफिकेट लेकर गए तो इनसे यूनिवर्सिटी के यूजीसी अप्रूव्ड होने का सर्टिफिकेट मांगा गया। तब बताया था कि यूनिवर्सिटी राजस्थान विधान सभा के यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत एप्रूव्ड है, इन बच्चों को यूनिवर्सिटी ने वही लिखकर दिया था।

सवाल : छह महीने पहले छात्रों के नकल करने का क्या मामला था.?

जवाब :  मैं अभी फार्मेसी बॉयज कॉलेज में लेक्चरर हूं। ये नकल वाला मुद्दे में जबरन मुझे जोड़ा जा रहा है। यह गर्ल्स कॉलेज का मुद्दा था। मैं अब वहां नहीं हूं, वहां पढ़ाता नहीं हूं, क्लासरूम में कभी कोई ईम्पोर्टेंट टॉपिक बता दिए होंगे तो चुनाव के चलते मेरा नाम घसीटा जा रहा है। अगर कोई टिपाई (नकल,चीटिंग) हुई होती तो क्या मैं अकेला यह सब करवा लेता, परीक्षा प्रश्न पत्र बनाने वाला कोई और, पेपर लेने वाला कोई और, पढ़ाने वाला और। मेरे नामजद रिपोर्ट दी है, मतलब मुझे जबरन फंसाया जा रहा है।

सवाल : जब आपसे संबंधित मामला नहीं, तो इंटरनल कमेटी क्यों गठित हुई थी.?

जवाब : हां, पहले एक बार इंटरनल कमेटी गठित हुई थी, तो उसने मुझे क्लियर कर दिया था। फिर दोबारा एक और बार इंटरनल कमेटी ने जांच की। अब एक साल बाद कमेटी बोल रही है कि मैंने संतोषप्रद जवाब नहीं दिया, कमेटी ने यह सवाल तब क्यों नहीं किया जब मैंने जवाब दिया था, कमेटी ने इस पर कोई लिखित लेटर नहीं दिया।

क्यों संवेदनशील है यह मुद्दा

फार्मेसी के कोर्स में छात्र का रेगुलर होना अतिआवश्यक होता है, क्यों कि यह कोर्स दवाईयों के जरिए आम जनता के स्वास्थ्य और जिंदगियों को प्रभावित करता है। सरकार ने भी किसी मेडिकल स्टोर के लाइसेस लेने या किसी ड्रग संबंधी व्यवसाय के लिए आवेदक के पास फार्मेसी में डिग्री या डिप्लोमा अनिवार्य किया हुआ है।

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