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पुलिस ने बनाए बाल मित्र : इन स्पाई किड्स ने बाल अपराध के खिलाफ छेड़ी जंग

संगीन अपराधों के खुलासे में भी मददगार साबित हो रहे

arln-admin by arln-admin
January 9, 2020
Reading Time: 1 min read
udaipur bal mitra spy kids


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लकी जैन,(ARLive news)। उदयपुर पुलिस की बच्चों को बाल मित्र बनाने की अनूठी पहल अब सकारात्मक परिणाम लाने लगी है। ये स्पाई किड्स (बच्चे) पुलिस से डरने के बजाए अब दोस्त बन गए हैं और पुलिस के साथ मिलकर अपने और आस-पास के बच्चों के खिलाफ हो रहे अपराध और शोषण को रोक रहे हैं।

बच्चियां निडर होकर खुद की बाल मित्र होने की पहचान बताती हैं और पुलिस को फोन कर मनचलों, उत्पाती, संदिग्धों की शिकायत तो कर रही रहीं हैं, साथ ही अपने आस-पास हो रही हर संदिग्ध गतिविधि के बारे में पुलिस को सूचित भी कर रही हैं। पुलिस ने गत दिनों इन बच्चों से मिली कई सूचनाओं पर कार्यवाही भी की।

पार्क में बैठे संदिग्धों और मनचलों की करते हैं शिकायत

हिरणमगरी थानाधिकारी हनुवंत सिंह राजपुरोहित ने बताया कि उनके थाना क्षेत्र के सरकारी और निजी स्कूलों के बच्चे बाल मित्र हैं। बाल मित्रों को थानाधिकारी और थाने के नंबर दिए गए हैं। हिरणमगरी में कॉलोनी पार्क और गार्डन की संख्या काफी है। हनुवंत सिंह बताते हैं कि थाने के नंबर और मोबाइल नंबर पर बाल मित्र के कॉल आते हैं और वे पार्क में बैठे संदिग्धों की शिकायत और सूचना हमें देते रहते हैं। स्कूल की 5 से ज्यादा बच्चियों ने भी निडर होकर हमें स्कूल और कॉलोनी के आस-पास घूमने वाले मनचलों और होने वाली छेड़छाड़ की घटनाओं की जानकारी दी, जिस पर पुलिस ने तत्काल एक्शन लेकर मनचलों को पकड़ा। पुलिस भी बालमित्रों से प्राप्त शिकायतों पर तत्काल एक्शन लेती है। ताकि बच्चों में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़े।

सुसाइड करते बच्चे को बचाया बाल मित्र किशोरी ने

प्रियांशी वसीटा एक बाल मित्र हैं। गत महीने वे अपनी सहेली के साथ ये उदयपुर की फतहसागर झील की पाल पर शाम को वॉक करने गयीं थीं। वहां इन्होंने करीब 12-13 साल के बच्चे को पाल पर अकेले बैठे देखा और वह यूनिफॉर्म में था। प्रियांशी को उसकी एक्टिविटी अटपटी लगीं। प्रियांशी वहां से जाने ही वाली थीं कि बच्चे ने फतहसागर में कूदने के लिए छलांग लगायी। प्रियांशी ने बड़ी स्मार्टनेस और तेजी के साथ उस बच्चे के बैग को पकड़ लिया और उसे फतहसागर में डूबने से बचाया। प्रियांशी उसे अपने घर लेकर गयीं और इसके बाद उसे पुलिस स्टेशन लेकर पहुंची।

अंबामाता थाना पुलिस ने बच्चे से बात की। बच्चा स्कूल में सहपाठियों से हुई बात पर परेशान था और बहुत डरा था। उसे डर था कि घर जाएगा तो मां-पिता भी उसकी बात नहीं सुनेंगे और उसे मारेंगे। पुलिस ने उस बच्चे की काउंसलिंग की और फिर उसके माता-पिता को बुलाकर उनके साथ भेजा।

चोरी का हुआ खुलासा

पुलिस ने बताया कि गत दिनों बाल मित्र का फोन आया कि हिरणमगरी के पार्क में कुछ संदिग्ध लोग बैठे हैं। पुलिस तत्काल वहां पहुंची, उन संदिग्धों को पकड़ा और पूछताछ की तो दो साल पहले हुई चोरी का खुलासा हुआ। इस प्रकार बच्चे अपराधियों को पकड़ने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।

ऐसे बनाए गए बाल मित्र

बाल मित्र योजना की इंचार्ज डीएसपी चेतना भाटी ने बताया कि हर थाने के सक्षम अधिकारी जैसे थानाधिकारी, थानेदार, एएसआई या अन्य पुलिसकर्मी क्षेत्र के स्कूल, कॉलेज गए। वहां स्कूल प्रिंसीपल की मदद से बच्चों से एक साथ बात की और उनकी समस्याओं के बारे में उनसे चर्चा की। उन्हें अपना मोबाइल नंबर, थाने का नंबर लिखवाया और आश्वस्त किया कि उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है, अगर उन्हें कोई परेशान कर रहा है या वे आस-पास कोई भी अपराध होता हुए देखें या किसी बच्चे के साथ शोषण होता हुआ देखें तो तुरंत कॉल करें। बीट कांस्टेबल भी रेगुलर स्कूल विजिट कर बच्चों के संपर्क में रहते हैं।

बाल मित्र बनाने से बच्चे पुलिस के दोस्त बने हैं : एसपी

यह पहल काफी सफल रही है। इससे किशोरावस्था के बच्चों में पुलिस के प्रति विश्वास और सम्मान बढ़ा है। स्कूल-कॉलेज के बच्चे हमसे जुड़े हैं और हमें उनके आस-पास होने वाली कई प्रकार की संदिग्ध गतिविधियों की सूचनाएं देते हैं। छात्राएं भी स्कूल-कॉलेज के आस-पास अगर कोई बदमाश दिखता है तो तत्काल थाने पर शिकायत करती हैं, इससे ईव टीजिंग की घटनाओं पर भी रोक लगेगी। : कैलाश चन्द्र विश्नोई,  एसपी, उदयपुर

Tags: #SpyKids#UdaipurBalMitra#UdaipurPolice#UdaipurPoliceBalMitra#UdaipurSpyKidsudaipur

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