उदयपुर,(ARLive news)। सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में गुरूवार शाम को टाइगर कुमार ने टाइगरस दामिनी को मार डाला। नर टाइगर कुमार मादा टाइगर दामिनी के एनक्लोजर में जाली तोड़कर अंदर घुसा और उस पर हमला कर दिया। दोनों के बीच आधा घंटे तक संघर्ष हुआ, जब तक बायोलॉजिकल पार्क के स्टाफ को दोनों टाइगर के संघर्ष का पता चला, घायल दामिनी की मौत हो चुकी थी।
घटनाक्रम की सूचना पर विभाग में हड़कंप मच गया, अधिकारी मौके पर पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम में विभाग के अधिकारियों और बायोलॉजिकल पार्क के स्टाफ की घोर लापरवाही सामने आयी है। क्यों कि टाइगर कुमार जाली को तोड़कर दूसरे एनक्लोजर में गया है, जो बायोलॉजिकल पार्क के स्वास्थ्य के लिए बेहद चिंताजनक स्थिति है। दोनों टाइगर के बीच एनक्लोजर के ओपन एरिया में संघर्ष हुआ। जिसे कई पर्यटकों ने देखा, इस खौफनाक संघर्ष देखकर पर्यटक भी सहम गए।
वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षण हॉफ जीवी रेड्डी ने बताया कि घटनाक्रम हुआ है। ऐसा सामान्यतौर पर नहीं होता है कि कोई टाइगर इतनी मोटी और मजबूत जाली को तोड़कर दूसरे टाइगर के एनक्लोजर में जाकर उस पर हमला कर दे। जिस टाइगर ने हमला किया उसे होल्डिंग एरिया में ले लिया गया है। टाइगर के जाली तोड़ने और दो टाइगर के बीच हुए संघर्ष के पीछे क्या कारण रहे उस पर जांच की जा रही है।
चार बड़ी लापरवाही : रोका जा सकता था यह घटनाक्रम
1. दो टाइगर (नर मादा) जब एक-दूसरे के सटे हुए एनक्लोजर में होते हैं, तो एक-दूसरे के पास आने का प्रयास करते हैं। ये एक-दूसरे को देख नहीं पाएं, इसके लिए दोनों एनक्लोजर के बीच की जाली पर कोई मेटल शेड या हरा पर्दा लगाया जाता है।
ऐसा वन विभाग ने टाइगर टी-24 उस्ताद के एनक्लोजर में किया था, ताकि वह दामिनी को नहीं दे पाए। तो टाइगर कुमार और दामिनी के एनक्लोजर के बीच की जाली पर कोई ग्रीन शेड या पर्दा क्यों नहीं लगाया गया। जबकि पहले भी इन्हें साथ रखने का प्रयास किया था तो इनमें संघर्ष की स्थिति बनी थी।
2. बायोलॉजिकल पार्क की शुरूआत अप्रेल 2015 में हुई थी। दो एनक्लोजर के बीच लगी जालियों को लगे करीब 5 से 6 साल हो चुके हैं। हर वर्ष बारिश सहित अन्य मौसम में यह जालियां खराब हो रहीं हैं, इनके मेंटीनेंस पर विभाग के अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। टाइगर कुमार जाली को तोड़कर दूसरे एनक्लोजर में गया है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
3. टाइगर इतना ज्यादा एग्रेसिव हो गया, उसने जाली तोड़ी, टाइगर दामिनी पर हमला किया, यह सबकुछ आधे घंटे तक चला, लेकिन बायोलॉजिकल पार्क के स्टाफ को पता नहीं चला।
4. सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद टाइगर या किसी भी वन्यजीवों की एक्टिविटी की कोई मॉनीटरिंग नहीं हो रही है। मॉनीटरिंग होती तो कुमार ने जब जाली तोड़ी तब ही अधिकारियों को पता चल जाता।


