मुंबई,(ARLive news)। महाराष्ट्र में सियासी घमासान के बीच भाजपा ने बाजी मारते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कुछ विधायकों को अपने पक्ष में लेकर सरकार बना ली है। देवेंद्र फडणवीस ने आज सुबह राजभवन में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में दोबारा शपथ ली। वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजीत को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई।
खबर सामने आ रही है कि महाराष्ट्र में सुबह 5 बजकर 47 मिनट पर राष्ट्रपति शासन हटा। जिसके बाद सुबह आठ बजे देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली और एनसीपी नेता अजित पवार ने उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिहं कोश्यारी ने शपथ दिलाई।
अजीत पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ और अनुशासनहीनता है : शरद पवार
तेजी से बदले राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने साझा प्रेस वार्ता बुलाई। प्रेस कांफ्रेस में शरद पवार ने कहा, ‘सरकार बनाने के लिए कांग्रेस, शिवसेना और एनसीपी नेता एक साथ आए। हमारे पास जरूरी संख्या थी। हमारे पास आधिकारिक नंबर थे। 44, 56 और 54 विधायकों ने सरकार बनाने के लिए समर्थन किया था। कई निर्दलीय विधायक भी हमारे साथ थे और हमारी संख्या 170 के आसपास थी। लेकिन अजीत पवार कुछ विधायकों को लेकर भाजपा के समर्थन में राजभवन पहुंचे।
अजीत पवार सहित भाजपा के समर्थन में गए विधायकों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्यवाही की जाएगी : शरद पवार
शरद पवार ने कहा सुबह-सुबह शपथग्रहण से हैरान हूं। उन्होंने आगे कहा, अजित पवार का फैसला पार्टी लाइन के खिलाफ है और अनुशासनहीनता है। एनसीपी का कोई भी नेता या कार्यकर्ता एनसीपी-भाजपा सरकार के पक्ष में नहीं है। भाजपा को समर्थन देने का फैसला अजित का है। जितने भी विधायक जा रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि एक दलबदल विरोधी कानून है और उनकी विधानसभा सदस्यता खोने की संभावना ज्यादा है। प्रक्रिया के अनुसार अजीत पवार के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फडणवीस बहुमत सिद्ध नहीं कर पाएंगे। हम सरकार बना सकते हैं।
शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने प्रेस क्रांफ्रेंस में कहा, लोकतंत्र के नाम पर खेल चल रहा है। हमने जनादेश का आदर किया है। वे लोगों को तोड़ते हैं और हम जोड़ते हैं। पवार साहब हमारे साथ हैं। शिवसेना जो करती है खुलेआम करती है। पहले ईवीएम खेल चल रहा था और अब यह नया खेल है। यहां से मुझे नहीं लगता कि चुनावों की भी जरूरत है। सभी को पता है कि जब छत्रपति शिवाजी महाराज के साथ धोखा हुआ और पीछे से वार किया गया तो उन्होंने क्या किया था।


